सोमवार, 3 मार्च 2008

कृषि क्षेत्र को उद्दोग का दर्जा दिया जाए.

यह बड़ी बिडम्बना है की जिस देश की ७० फीसदी जनता कृषि व्यवसाय से जुड़ी हो , उस देश मैं वही व्यवसाय उपेक्षित सा है । देश के मुख्य बजट मैं उसे विशेष स्थान न देकर दोयम दर्जे का माना जाता है । परिणामस्वरूप कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए लोगो को भारी परेशानी का सामना कर पड़ रहा है। कही किसान खड़ी फसल जलाने को बाध्य हो रहा है तो किसान कृषि व्यवसायों मैं होने वाले नुकसान के चलते आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे है। साथ ही फायदे का सौदा न होने के कारण लोग उस व्यवसाय से मुंह मोड़ने लगे है। फलस्वरूप ग्रामीण जनता को भारी बेरोजगारी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। योजना आयोग के रपट के अनुसार २७ फीसदी किसान खेती को फायदे का कारोबार न मानकर परंपरागत किसान होने के नाते करते है। वही ४० फीसदी किसान कृषि व्यवसायों से पीछा छुड़ाना चाहते हैं ।
अतः सरकार को कृषि को विशेष उद्धोग का दर्जा देते हुए कृषि कार्य मैं सलंग्न लोगों एवं किसानों की समस्याओं के निराकरण एवं समाधान हेतु राज्य और केन्द्र स्तर पर विशेष प्रयास किए जाने चाहिए । देश के प्रत्येक क्षेत्र की स्थानीय भौगोलिक परिस्थिति आधारित कृषि की उन्नत तकनीक एवं कृषि यंत्रों को विकसित किया जाना चाहिए । किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जाना चाहिए । खाद की प्रचुरता मैं उपलब्धता सुनास्चित किया जाए , गोबर खाद एवं जैविक खाद को अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जाने चाहिए , जिसे वह अपने स्तर से बना सके , इस हेतु आवश्यक आर्थिक सहायता दी जाना चाहिए । सब्जियों , फलो एवं अनाज के भण्डारण हेतु सस्ते दरो पर भण्डारण सुबिधा उपलब्ध कराना चाहिए । इस हेतु प्रत्येक ग्राम स्तर पर भण्डारण ग्रहों को खोला जाना चाहिए । फसलों को उचित मूल्य पर खरीदने एवं भण्डारण हेतु सरकार को स्वयं आगे आना चाहिए । कृषि की उन्नत तकनीक अपनाने हेतु प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्राम स्तर पर अधिक से अधिक प्रशिक्षण एवं प्रदाशन कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए । कृषि कार्य हेतु आवश्यक जल राशी उपलब्ध हो , इस हेतु वर्षा के जल का भण्डारण एवं जल श्रोतों के किफायती और समुचित उपयोग हेतु प्रेरित किया जाना चाहिए । सिंचाई कार्य हेतु पर्याप्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित किया जावे और परमपरागत एवं उन्नत सिंचाई तकनीक के उपयोग हेतु बधाबा दिया जाना चाहिए । कृषि कार्य मैं सलग्न लोगो का पलायन रोकने एवं युवाओ को इस क्षेत्र मैं कार्य करने हेतु प्रेरित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों मैं कृषि को अनिवार्य विषय बनाना चाहिए । प्रत्येक जिला स्तर पर कृषि महाविद्यालय एवं खंड स्तर पर कृषि विद्यालय आवश्यक रूप से खोला जाना चाहिए । कुछ किसान ऐसे है जिनके पास भूमि है किंतु कृषि कार्य हेतु पर्याप्त संसाधन एवं पर्याप्त राशी नही है , कुछ किसान ऐसे है जो काम तो करना चाहते है किंतु कृषि कार्य हेतु भूमि एवं पर्याप्त संसाधन नही है , ऐसी स्थिति मैं कृषि भूमि को सरकार द्वारा किराया मैं लेकर स्थानीय लोगो से कृषि कार्य करवाना चाहिए। बहुत से बंजर एवं बेकार पड़ी राजस्व भूमि को इसी प्रकार कृषि कार्य हेतु उपयोग मैं लिए जाना चाहिए। कृषि उपज आधारित उद्दोग को अधिक से अधिक संख्या मैं स्थापित करने हेतु विशेष प्रयाश किए जाने चाहिए। इन कार्यो मैं स्वशाशी संस्थाओ का भी सहयोग लिया जाना चाहिए।
उपरोक्त अनुसार प्रयासों से स्थानीय लोगो का पलायन तो रुकेगा साथ ही नए रोजगार का सृजन होगा। राज्य एवं केन्द्र सरकार को बिना किसी राजनेतिक नफे नुकसान को ध्यान दिए कृषि क्षेत्र को बढावा देने हेतु कार्य किया जाना चाहिए। तभी हमारा देश विकास पथ पर दोड सकेगा जिसमे हर छोटे से छोटे तबके की भी हिस्सेदारी सुनास्चित हो सकेगी एवं सभी को इसका लाभ भी मिल पायेगा।

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