गुरुवार, 27 मार्च 2008

बिकने को तैयार हैं , बस खरीददार चाहिए !

एक समय था जब इंसान की कोई कीमत नहीं थी । इंसान अपने शरीर को ढोते हुए बहुत कम मैं भी गुजारा कर लेता था । अब इंसान चाहे वह बड़ी शक्शियत हो या आम इंसान , सभी कीमती हो गए हैं । क्योंकि इस उपभोग वादी संसार मैं सब कुछ बिकने को तैयार हैं । तो इंसान क्यों पीछे रहे । पहले मजबूरी मैं इंसान बिकने के लिए तैयार था और उसे बड़ी हेय की द्रष्टि से देखा जाता था । अब तो हर इंसान एक वस्तु या सामान के तरह बाज़ार मैं बिकने को तैयार है । हर इंसान की कीमत उसकी उपलब्धि और रुतबे के हिसाब से तय हो रही है । यहाँ तक की उसके अंग अंग की कीमत भी मिलने लगी है । आज देखो इंसान की कैसी बोली लग रही है , सांसदों , विधायकों और नेताओ की कीमत कहीं अपने पक्ष मैं वोट देने की लिए तो कहीं संसद मैं प्रश्न पूछने के लिए । खिलाड़ियों की तो बल्ले बल्ले हो रही है , आई पी एल , आई सी एल जैसी संस्था पैसा लेकर घूम रही हैं । क्या देश , विदेश के भी खिलाड़ी बिकने के लिए तैयार हैं । फिल्मी कलाकार बिकने के लिए तैयार है , यहाँ तक की वे शादी जैसे समारोहों मैं शरीक होने के लिए बिकने को तैयार हैं फिल्मों एवं रेम्प मैं जैसे चाहे चलने को तैयार है । गायक , अभिनेता , कलाकार , रचनाकार , लेखक तथा अन्य सभी प्रतिभाएं बिकने के लिए तैयार हैं । बस आपके जेब मैं पैसे होना चाहिए । दूल्हा अपनी नौकरी व व्यवसाय के दम पर तो दुल्हन अपनी सुन्दरता व नौकरी के दम पर बिकने को तैयार है । क्या सरकारी कर्मचारी / अधिकारी सभी इंसानों की मंडी मैं बिकने को तैयार हैं । आम आदमी के भी खरीदार भी हैं। कोई उनकी किडनी तो कोई आँख तो कोई उनका खून तो कोई उनकी पुरी बाडी खरीदने को तैयार हैं । इस भौतिकवादी युग मैं सब एक सामान बनकर बिकने के लिए तैयार हैं । हाँ एक बात यह हो सकती है की फिर आपकी जिन्दगी आपकी न रहे , आपकी इक्छा , आपकी भावना , आपका मन , आपके समस्त गतिविधियाँ खरीददार के हर एक इशारे के लिए मोहताज हो । सच ही तो हो आज का इंसान इमान व भावना विहीन होकर एक वस्तु अर्थात सामान बनकर दौलत की मंडी मैं बिकने के लिए तैयार खड़ा है ।

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