सोमवार, 31 मार्च 2008

क्यों न क्रिकेट को राष्ट्रीय खेल घोषित जाए !

क्रिकेट के लोकप्रियता को देखते हुए आपके मन मैं भी यह बात उभर कर आती होगी की क्यों न क्रिकेट को देश का राष्ट्रीय खेल घोषित किया जाए। आज जबकि क्रिकेट बच्चो से लेकर बूढे तक का पसंदीदा खेल बन गया है । सभी लोग अपने कार्यों को छोड़कर सारा दिन इस खेल को न सिर्फ़ देखते हैं वरन खेलते भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस खेल ने खेल जगत मैं देश को एक ने पहचान दिलाई है। क्रिकेट की खेल संस्था बी सी सी आई की भी विश्व मैं अच्छी धाक हैं। इस खेल की लोकप्रियता को देखते हुए इसे ओलंपिक खेलो मैं भी शामिल करने की सहमति बन चुकी है। साथ ही इस खेल से जुड़े सभी लोग चाहे वह खिलाड़ी हो , खेल संस्था या फिर मीडिया , सभी के लिए भरपूर पैसा है । अन्य खेलों की तुलना मैं यह खेल विश्व मैं बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसकी लोकप्रियता को देखते हुए आई सी एल एवं आई पी एल जैसी नामी गिरामी संस्थाओं तथा अनिल अम्बानी , शाहरुख़ एवं प्रीती जिनता जैसी हस्तिया भी जुड़ रही है। सबसे बड़ी बात यह है की इस खेल के लिए ज्यादा कीमती खेल सामग्रियों के आवश्यकता नही होती है। ग्रामीण बच्चे तो एक बाल तथा बल्ले के रूप मैं एक लड़की के पत्टते से खेलते है । मीडिया द्वारा भी इस खेल को अन्य खबरों के अपेक्षा कुछ ज्यादा ही ताबज्जो दी जाती है । क्रिकेट के हीरो तो फिल्मी हीरो को मात कर लोकप्रियता के शिखर को चढ़ रहे हैं। जिस देश के लोगों की खेल के प्रति दीवानगी है की क्रिकेट जीतने पर उनके लिए ईद व दीवाली एवं हारने पर मातम होता है ।
तो क्यों न इस बात पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाना चाहिए
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