बुधवार, 11 जून 2008

कौन घड़ी आवेंगे भगवान् ।

आस लगाये बैठे हैं कौन घड़ी आवेंगे भगवान् ।
मुम्बई के महिम तट पर मीठा हुआ पानी तो लगा की आए भगवान् ।

मूर्तियों ने दुग्ध पान किया तो लगा की आए भगवान् ।

तस्वीरो से आंसू निकले तो लगा की आए भगवान् ।

मदर टेरसा की तस्वीर से हुआ चमत्कार तो लगा की आए भगवान् ।

चमत्कारिक घटना की आहट कोई हुई तो लगा की आए भगवान् ।

मन्दिर ,मस्जिद , चर्च और गुरुद्वारा गया तो लगा की आए भगवान् ।

साधू संत और फकीर आए तो लगा की आए भगवान् ।

कुम्भ , काबा और बेथलहम पंहुचा तो लगा की आए भगवान्

ईद , दीवाली और क्रिसमस आए तो लगा की आए भगवान् ।

कलियुग के इस दौर मैं भूख , भय और भ्रष्ट आचार से मुक्ति दिलाने

आस लगाये बैठे है , कौन घड़ी आवेंगे भगवान् ।

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

आपको पढ़ा तो लगा की आए भगवान . :)

DR.ANURAG ने कहा…

हमने तो ये आस छोड़ दी है साहब.....