शनिवार, 26 जुलाई 2008

बम धमाकों की गूँज दुबारा सुनने को न मिले !

आए दिन देश मैं कंही न कंही बम धमाकों की गूँज समाचार पत्रों , रेडियो और टीवी के माध्यम से सुनाई देती रहती है , परन्तु क्या अब यह गूँज सरकार और प्रशाशन को पहले जैसे विचलित और उद्देलित करती है ? क्या अब भी पहले जैसे मन सिहर उठता है ? क्योंकि अब तो यह हमेशा सुनाई देती रहती है अब तो उसका कर्कश शोर सुनने की आदत सी हो गई होगी । इन धमाकों की गूँज मैं कितने ही लोग घायल और हताहत हुए होंगे , कितनो ने अपने परिवार के प्रिय सदस्यों को खोया होगा । कितने ही लोग इन धमाकों की गूँज मैं शारीरिक और मानसिक रूप से लाचार और विवश हो गए होंगे । ये बम धमाकों को बार बार सुनने और इनके त्राशदी को झेलना देश के लोगों की नियति बनते जा रहे हैं , वह भी देश के प्रशासन और सरकार के विफलता पूर्ण अदूरदर्शी नीतियों के कारण । इन बम धमाकों की त्राशदियों पर हर बार की कुछ राजनेता और अधिकारी आयेंगे और हमेशा की तरह कई घोषणाओं और आश्वाशानो की झडी लगा जायेंगे , और फिर वाही धाक के तीन पात वाली स्थिति हो जायेगी और फिर किसी दूसरे बम धमाकों की घटना होने तक कुम्भ्करनी नींद सो जायेंगे । प्रभावित शहर मैं भी कुछ दिन बाद सब कुछ भूलकर फिर बेफिक्र होकर सामान्य जीवन बहाल हो जायेगा । बस इस त्राशदी की पीड़ा को झेलने को मजबूर होगा तो सिर्फ़ प्रभावित परिवार और प्रभावित लोग ।
किंतु इन सबके बीच आतंकी और विकृत मानवीय मानसिकता वाले लोग फिर एक नए धमाकों को देश के किसी नए कोने मैं अंजाम देने हेतु जुट जायेंगे , वह भी देश के लोग और प्रशासन और देश की सुरक्षा एजेन्सी को चकमा देकर । एक बात यह है की आतंकी और विकृत मानवीय मानसिकता वाले लोग जरूर चौकन्ने रहते हैं परन्तु हम यह सब भूलकर बेफ्रिक्र हो जाते हैं ।
अतः आवश्यक है की दुबारा ऐसी त्राषद पूर्ण घटना देश मैं कंही भी न घटे और धमाकों की गूँज पुनः न सुनाई दे इस हेतु प्रशासन और देश की सुरक्षा एजेन्सी के साथ साथ आमजन को भी चौकन्ने और सजग और सचेत रहना होगा । अपने आस पास होने वाली हर छोटी और बड़ी हलचलों पर नजर रखना होगा तभी हम इन दर्दनाक और विध्वंशक घटनाओं और आतंकी और विकृत मानवीय मानसिकता वाले लोगों के विकृत मंसूबों पर रोक लगा सकेंगे ।

1 टिप्पणी:

परमजीत बाली ने कहा…

सही विचार प्रेषित किए हैं।आभार।
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