मंगलवार, 16 सितंबर 2008

अजी ये कैसे चयन कर्ता है !

अजी हाँ मैं कोई क्रिकेट , हांकी या किसी खेल की टीम के चयन कर्ता या फिर किसी रोमांचक और साहसिक कार्य के लिए चुने वाले दलों के चयन कर्ताओं की बात नही कर रहा हूँ , जिन्हें की उनके क्षेत्रों के भरपूर ज्ञान और अनुभव रहता है , उनकी एक निर्धारित योग्यता रहती है । उन्हें चयन किए गए या चुने गए उम्मीदवारों को चयन करने के साथ बापस हटाने या बुलाने का अधिकार भी रहता है ।
किंतु यहाँ चयन कर्ता को न कोई योग्यता की जरूरत होती है और न कोई अनुभव की । और तो और उन्हें यह तक नही पता होता है की हम जिस उम्मीदवार का चयन करने जा रहे है उसकी योग्यता क्या है ? उसे हम किस दल और किस टीम और किस कार्य के लिए चुन रहे है यह भी पता नही रहता है । चयन कर्ता इतने कमजोर और इक्छा शक्ति मैं कमी वाले होते हैं की उन्हें साम , दाम और दंड भेद से किसी भी दिशा मैं बहकाया जा सकता है । और यदि वे किसी उम्मीदवार का चयन भी कर लेते हैं तो उसे हटाने या बापस बुलाने का अधिकार भी नही रहता है ।
जी हाँ हमारे लोकतंत्र के मुख्य आधार स्तम्भ है , अर्थात वोटर या मतदाता । न तो उन्हें कोई योग्यता की जरूरत होती है , और न कोई अनुभव की , और न कोई उनके पारिवारिक इतिहास की । बस उन्हें देश का नागरिक होने के साथ उनकी उम्र १८ वर्ष होनी चाहिए । फिर चाहे वह अनपढ़ हो , अपराधी हो या फिर कुछ और । और उनके कन्धों पर उन उम्मीदवारों को चुनने की जिम्मेदारी होती है जो उसके क्षेत्र , जिला , प्रदेश और देश की लाखों करोरों लोगों की भावनाओं और विचारों का प्रतिनिधितव करते है , लोगों की समस्याओं और क्षेत्र के विकास के लिए जिन्हें अथक प्रयास और मेहनत करना होता है ।
इन सब कमियों के चलते ही ताओ आज देश के राजनेता मनमानी करने पर तुले हुए हैं , क्योंकि एक बार चुनने के बाद ताओ कोई हटा नही सकता है . और दूसरी बात यह भी है की उनकी इन कारगुजारियों को आम अनपढ़ और नासमझ मतदाता कितना समाज पायेगा , उन्हें पता है की चुनाव के नजदीक समय पर साम दाम और दंड भेद से इन मतदाताओं को बरगलाया जा सकता है . इस लोकतान्त्रिक देश मैं इन राजनेताओ द्वारा देश का कैसा मजाक बनाया जा रहा है की पढ़ा लिखा और समझदार बुद्धिजीवी वर्ग अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है और मन मसोस कर रह जाता है .

अतः प्रदेश और देश को चलाने वाली टीम का चयन करने वाले चयन कर्ताओं हेतु कुछ तो योग्यता का निर्धारण होना चाहिए । ताकि वह स्व विवेक से अपने वोट के महत्व और चयन किए जाने वाले उम्मीदवार की साख , उसके सामाजिक कार्यों और उसकी योग्यता को देखते हुए फ़ैसला कर अपना अमूल्य वोट दे सकें , और उसे पाँच साल तक किम कर्तव्य बिमूढ़ होकर हाथ मलते रह जाना न पड़े ।

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