सोमवार, 22 सितंबर 2008

उम्मीद करें की जांबाज सिपाही शर्मा जी का बलिदान जाया नही जायेगा !

जिस बहादूरी से दिल्ली की ए टी सी सेल के जांबाज ऍम सी शर्मा जी ने देश के लिए बलिदान दिया है जिसे सारा देश कभी नही भुला पायेगा । आज उनके इस बलिदान का ही परिणाम है की दिल्ली के वासी चैन और राहत की साँस ले रहा है नही तो न जाने कितने और धमाके दिल्ली वासी और देश को झेलने पड़ते । उन्ही के ही बलिदान के कारण देश के अन्य राज्यों मैं हुए बम धमाकों के जिम्मेदार लोगों को ढूँढने मैं सफलता मिल रही है । दिल्ली के जामिया नगर के एल- १८ से पकड़े गए आतंकवादी की ही बदोलत देश मैं फ़ैल रहे आतंकवाद की जड़ों तक पहुचने मैं सरकार और पुलिस को मदद मिल रही है ।
बेशक दिल्ली पुलिस और देश की अन्य राज्यों की पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेन्सी दिन रात मेहनत कर धमाकों मैं लिप्त आतंकवादी और आपस मैं जुड़े उनके तार को खोजने लगी हुई है । और इन्ही सतर्क सुरक्षा एजेन्सी और पुलिस के कारण ही आज देश और देश के लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं । हाँ कुछ खामी हो सकती है और हो सकता है कुछ लोग अपने जिम्मेदारी मैं कोताही बरतते हो , किंतु इस लिहाज़ से सभी को दोष नही दिया जा सकता है । आख़िर वे भी हमारे समाज के बीच के इंसान होते हैं और उनके भी परिवार होते हैं । फ़िर भी उन लोगों द्वारा इन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बाबजूद देश और देश के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बखूबी निभायी जा रही है । दिन रात एक कर और जान जोखिम मैं डालकर हमारी देश की पुलिस और सुरक्षा एजेन्सी द्वारा आतंकवाद के पीछे छुपे आतंकवादी चेहरे को बेनकाब करने का प्रयास किया जा रहा है । और इसमे इन्हे सफलता भी मिल रही है ।
किंतु जिस बहादूरी से और जान जोखिम डालकर इन आतंकवादी घटना के जिम्मेदार अपराधियों को पकड़ा जाता है उसी अनुपात मैं और उसी जज्वे के साथ हमारा यह तंत्र इन्हे सजा दिलाने मैं नाकाम रहता है । यंहा तक की कोर्ट द्वारा दोषी करार दिया जाने के बाद भी इन्हे सजा मिल नही पाती है । अभी भी पहले पकड़े गए कई आतंकवादी या तो जेल मैं मेहमान बनकर रह रहे हैं या फिर कोर्ट से दोषी सिद्ध हो जाने के बाद भी उन्हें सजा नही दिलाई जा सकी है । संसद परिसर मैं हुई घटना के अपराधी कोर्ट द्वारा दोषी सिद्ध हो जाने के बाद भी उन्हें सजा न मिलना देश की क़ानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह है । ऐसा लगता है की इस घटना मैं शहीद हुए वीर जांबाज सिपाहियों के बलिदान को नजरअंदाज किया जा रहा है ।
ऐसे मैं देश की पुलिस और सुरक्षा एजेन्सी के जांबाज कर्मयोद्धा के मनोबल मैं कमी आना स्वाभाविक है । जिस तेजी से और वीरता को अंजाम देकर हमारे देश के वीर जांबाज द्वारा अपराधियों को पकड़ा जाता है उसी तेजी से और तत्परता से इन्हे सजा नही दिलाई जाती है ।
देश की सुरक्षा मैं लगे जांबाज कर्मयोद्धा का मनोबल और देश भक्ति का जज्बा हमेशा ऊँचा रहे जिसके लिए आवश्यक है की जान की बाज़ी लगाकर पकड़े गए अपराधी को उनकी सजा के अंजाम तक पहुचाना जरूरी है । न्याय व्यवस्था भी ऐसी हो की ऐसे अपराधों की सुनवाई तेजी से की जाए । देश की सरकार और राजनेताओं को भी अपने हितों से ऊपर उठकर ऐसे अपराधियों को जल्द जल्द से सजा दिलवाने का प्रयास किया जाना चाहिए । अतः हम देश वासी आशा करेंगे और भगवान् से प्रार्थना करेंगे की देश के वीर जांबाज कर्मयोद्धा ऍम सी शर्मा जी का बलिदान एवं देश की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा मैं शहीद हुए वीर जाबांजों का बलिदान जाया नही जायेगा ।

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

उम्मीद के सिवाय हम आप और कर भी क्या सकते हैं..हम आपके साथ हैं.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही अच्छा लेख लिखा हे आप ने,धन्यवाद