बुधवार, 24 सितंबर 2008

ना कोई सीमा ना कोई बंधन - बस एक ब्लॉग और खुलकर कहो बात !

हिन्दी ब्लॉग हम हिन्दी भाषी लोगों के लिए एक सशक्त अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है । हम बेधड़क और बेवाक तरीके से अपनी बात इस माध्यम से अभिव्यक्त कर सकते हैं । ना कोई रोकने वाला और ना कोई टोकने वाला , जो मन मैं है , जो मन मैं द्वंद है , जो कसक है उसे शव्दों मैं पिरोकर व्यक्त कर दो । यंहा कोई सेंसर बोर्ड नही है जो आपकी अभिव्यक्ति पर कांट छाँट कर सके । अतः यंहा पूर्ण अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता है । अब वो दिन लद गए जब हमें अभी बात पहुचाने के लिए समाचार पत्रों का माध्यम लेना पड़ता था , और उस पर आपकी बात छपेगी या नही इस बात की कोई गारंटी नही , यदि छाप भी दी गई तो वह भी कांट छाँट के साथ , पता लग जो बात आप कहना चाह रहे हैं उसे छापा ही नही गया । किंतु शुक्र है की ब्लॉग मैं ऐसा नही है । ब्लॉग मैं बात कहने का एक सबसे बड़ा फायदा है की इसमे कोई क्षेत्र ,प्रदेश और देश की सीमा नही है , यह सीमाहीन है , ब्लॉग के माध्यम से अपनी बात रखने का मतलब है अपनी बात को सार्वभोमिक रूप मैं विश्व के कोने कोने मैं बैठे हिन्दी भाषी बुद्धिजीवी बंधुओं तक पहुचाना । अब तो हम भाषा परिवर्तन की सुबिधा को अपने ब्लॉग मैं जोड़कर अपनी बात को विभिन्न भाषा भाषी के लोगों को पढने हेतु दे सकते हैं यानी की अब भाषा का बंधन भी ख़त्म । साथ ही यह एक तरफा माध्यम नही है की अपनी बात रखने के बाद उस पर लोगों की प्रतिक्रिया न जान सके , यह तो द्वि तरफा मार्ग प्रदान करता है की अपनी बात कहने और लोगों की बात सुनने का अवसर भी प्रदान करता है ।
हिन्दी ब्लॉग सृजनात्मक द्रष्टिकोण एवं लेखन प्रतिभा वाले नए प्रतिभाओं को उचित मंच और अवसर प्रदान करने मैं महत्ती भूमिका निभा रहा है । अतः परिणामस्वरूप हम हिन्दी ब्लॉग जगत मैं नित नए हिन्दी ब्लॉगर का पदार्पण होते देखा जा सकता है ।
अतः हिन्दी ब्लॉग निसंदेह हिन्दी भाषा को पुष्पित और पल्लवित होने का अवसर प्रदान कर उसे विश्व स्तर पर सम्रद्ध और सशक्त बनाने मैं मददगार साबित हो रहा है । अब विश्व की कई वेबसाइट और सर्च इंजन भी हिन्दी मैं आ गए हैं । हिन्दी ब्लॉग और सशक्त और प्रभावशाली बनकर विश्व मैं अपना परचम लहरा सके अतः आवश्यक है की हम विचार अभिव्यक्ति के इस माध्यम का समाज , देश और विश्व हित मैं इसे एक सशक्त माध्यम के रूप मैं प्रयोग करें । देश और विश्व मैं शान्ति , भाईचारा , भलाई और विकास के लिए करें । इसे देश और विश्व मैं फैली विभिन्न समस्यायों के निराकरण और समाधान के मंच के रूप मैं तब्दील करने का प्रयास करें ।
तो फ़िर क्यों न हम ब्लॉग के माध्यम से खुलकर अपनी बात रखें और इसे समाज हित मैं मनन और समाधान का माध्यम बनाएं ।

8 टिप्‍पणियां:

rakhshanda ने कहा…

very nice thinking...we r with u...

डॉ .अनुराग ने कहा…

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ एक अलिखित जिम्मेदारी भी आती है...जिसका ध्यान हर हर ब्लोगर को रखना चाहिये

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बिल्कुल सही लिखा है आपने ..ब्लॉग के माध्यम से दिल की बात बहुत आसानी से लिखी सुनी जा सकती है पर आपके शब्द किसी को पीड़ा न पहुंचाए यह ध्यान रहे

mamta ने कहा…

आपने बिल्कुल ठीक लिखा है । और रंजू जी की बात से भी सहमत है।

mahendramishra ने कहा…

apke vicharo se sahamat hu.thanks

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप ने सही लिखा हे लेकिन हमारी आजादी वही खत्म हो जाती हे जहां से दुसरे की शुरु होती हे, यानि हमे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वही तक हे जहां तक दुसरे को हमारी बात से कोई ठेस ना लगे, दुसरे की बेज्जती ना हो,
फ़िर इस बांलाग की दुनिया मे हमारे बच्चे, हमारी बहिने ओर बच्चिया भी आती हे इस लिये वही लिखना चाहिये जो यह सोच कर की कल मेरी बेटी, मेरी बहिन भी उसे पढ सके.
धन्यवाद

जितेन्द़ भगत ने कहा…

मेरा भी यही मानना है, आजादी के साथ एक जि‍म्‍मेदारी भी आती है।

अनूप शुक्ल ने कहा…

ब्लाग लेखन मतलब- आजादी के साथ जिम्मेदारी मुफ़्त में।