शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

विनम्र अपील धार्मिक उत्सव आयोजन कर्ताओं के नाम !

देश मैं ईद और नवरात्र के पर्व के अवसरों पर भक्तिमय उल्लाश और खुशियों का सुखद वातावरण बना हुआ है । जगह जगह गाँव और शहर मैं पंडाल , स्वागत द्वार अवं तोरण द्वार सजे हुए हैं । कंही ईद के दावतों का आयोजन हो रहा है तो कंही मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है । इन उल्लासपूर्ण और खुशनुमा माहोल मैं छोटी छोटी बातों को ध्यान रखा जावे , जिससे लोगों को एवं समाज को कोई असुबिधा न हो , पर्यावरण को नुकसान न हो , उर्जा का सरक्षण हो एवं देश मैं सुखमय , सुखमय एवं शांतिपूर्ण वातावरण बना रहे । अतः आयोजनकर्ताओं से विनम्र अपील है की
१। भीड़ भाड़ वाले एवं व्यस्तम चोराहे वाले स्थान मैं सार्वजानिक आयोजन से बचे , हो सके तो खुले एवं मैदानी स्थानों का चयन किया जाए , आना जाने का मार्ग अवरुद्ध न हो । सकरे एवं तंग गलियों वाले स्थानों मैं एक से अधिक वैकल्पिक रस्ते बनाए जाएँ ।
२। आयोजन हेतु एकत्रित की जाने वाली सहयोग राशिः / चंदे की राशिः हेतु लोगों को मजबूर न करे । एकत्रित धनराशी का किफायती एवं समाज की भलाई मैं उपयोग कर उसके आय एवं व्यय का ब्यौरा पूर्ण पारदर्शिता के साथ लोगों के सामने रखें ।
३। लोउड स्पीकर के स्थान पर बॉक्स का प्रयोग करें । आवाज की तीव्रता एवं समय का ध्यान रखे की बच्चों , बुजुर्ग और बीमारों को अ सुबिधा न हो ।
४। बिजली की कमी को देखते हुए विद्युत उर्जा आधारित साज सज्जा मैं किफायत के साथ कम बिजली खपत वाले उपकरण एवं लाइटिंग का प्रयोग करें । दिन मैं बिजली का प्रयोग न के बराबर करें , नियमानुसार अस्थायी बिजली कनेक्शन अवश्य लें ।
५। पर्यावरण को नुक्सान न पहुचाने वाली इको फ्रेंडली साज सज्जा एवं मूर्तियों को चुने । मूर्तियों का विसर्जन इस प्रकार करें की पेयजल श्रोतों और जल श्रोतों का जल प्रदूषित न हो ।
६। झांकियां की अवधारणा ऐसी हो की जिससे धार्मिक भावना एवं आस्था को ठेश न पहुचे एवं देवी देवताओं का सम्मान बना रहे ।
७। धार्मिक आयोजन स्थलों पर धार्मिक एवं सादगी पूर्ण गाने बजाये जाएँ । आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम फूहड़ एवं अमर्यादित न हो ।
८। प्रसाद वितरण , भोज एवं दावतों के आयोजन मैं खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं साफ़ सफाई का पर्याप्त ध्यान रखा जावे । वितरण के पर्याप्त इंतज़ाम किए जावें जिससे भीड़ भाड़ , अव्यवस्था और भगदड़ जैसी अप्रिय स्थिति न बने ।
९। कोई अप्रिय स्थिति होने पर तुंरत पुलिस एवं प्रशासन को सूचित करें । आवश्यक तात्कालिक व्यवस्था बनाने का पूरा प्रयास एवं सहयोग करें ।

2 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

आपने बातें तो बिल्कुल उचित उठाई हैं..मगर अफ़सोस है कि अपने यहां विनम्रता से इन बातों को सुना समझा नहीं जाता..मैं भी मह्सूस कर रहा हूं कि इन दिनों ये ढकोसले बढते ही जा रहे हैं...

राज भाटिय़ा ने कहा…

भाई आप की राय बहुत सुंदर, लेकिन होता इस से बिलकुल विपरीत है, क्योकि अब आस्था सिर्फ़ दिखाने की रह गई है, कोई भी पुजा मन से नही करता बल्कि ढकोसला ही करता है, जो पुजा मन से करते है उन्हे यह ढकोसलो से कोई मतलब नही.
धन्यवाद इस अति सुंदर लेख के लिये