बुधवार, 13 सितंबर 2017

प्रभाव या अभाव - मासूमों का बचपन कुचलने पर आमादा ।


यह इंसान की  पतित विकृत मानसिकता का प्रभाव है ,
या भौतिकवादी इंसान की नैतिक सोच का आभाव ?
यह धड़ल्ले से परोसी जा रही अश्लीलता का प्रभाव है ,
या इंसान के अच्छे बुरे में अंतर की सोच का आभाव ?
यह मन में सुलग रही हवस की चिंगारी का प्रभाव है ,
या मन की अनैतिक इक्च्छाओं पर नियंत्रण का आभाव ?
जो मौका पाते ही  इंसान को वहशी दरिंदा और हैवान बना कर ,
इस देश के नोनिहालों का शोषण और उत्पीड़न  करवा रही है |
असुरक्षित और भययुक्त वातावरण निर्मित कर ,
एक मासूम का खिलखिलाता बचपन कुचलने पर आमादा कर रही है ।

क्या मिलेगा #बेटियों को #खिलखिलाता और #सुरक्षित #जहान !

आज एक मासूम का सुरक्षित नहीं है मान सम्मान और जहान। आखिर बेटियों को क्यों शिकार बना रहा है  हर उम्र का इंसान। क्या हमारी सामाजिक व्यवस...