मंगलवार, 25 जुलाई 2017
खुलकर मुस्कुराने दो हमें ।
›
खुलकर मुस्कुराने दो हमें , न दबे बचपन किताबों के बोझों के तले । फूलों की तरह खिलने दो हमें , न झुलसे मासूमियत बड़ों के अरमानों के ...
4 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें