शनिवार, 30 अप्रैल 2022

बस इतना ही किया करते हैं !

Image गूगल साभार 


इन दो #आंखों से ,

बस इतना ही किया करते हैं ,

जितना दिल किया,

उनका #दीदार किया करते हैं ।


वो  रोक तो  सकते नहीं हैं ,

चाहे देखा करें उनके ही सपने हैं,

या दीदार करें उनके ही कितने हैं,

जितना है बस में  देख उतना,

दिल को तसल्ली से भरा करते हैं । 


वो हमें भले ही  देखा न करें ,

हो हम अभी उनके मन से परे,

हो सकता है हम नजरों में उनकी खलते हैं ,

पर जब भी वो सामने आते हैं,

उनकी नजरों से हम तो उलझा किया करते हैं ।


आयेगा एक दिन ऐसा  काश ,

जब वो होंगे सदा मेरे पास ,

ऐसे खयाल अब दिल में मचलते हैं ,

दीप इन ख्वाहिशों के जला,

अब तो दिन रात लिये फिरते हैं । 


इन दो आंखों से ,

बस इतना ही किया करते हैं ,

जितना दिल किया,

उनका दीदार किया करते हैं ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (1-5-22) को "अब राम को बनवास अयोध्या न दे कभी"(चर्चा अंक-4417) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय कामिनी मेम,
    इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार (1-5-22) को "अब राम को बनवास अयोध्या न दे कभी"(चर्चा अंक-4417) पर शामिल करने हेतु बहुत धन्यवाद एवं आभार ।
    सादर ।

    जवाब देंहटाएं
  3. आदरणीय अनीता मेम,
    आपकी सुंदर और सकारात्मक प्रतिकृया हेतु बहुत धन्यवाद एवं आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  4. आदरणीय रवि सर ,
    आपकी सुंदर और सकारात्मक प्रतिकृया हेतु बहुत धन्यवाद एवं आभार ।

    जवाब देंहटाएं

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