रविवार, 28 जून 2026

कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

 


कर दो दिल को आज़ाद

एहसान मानेंगे जनम  सात .

 

तुम आओ न मेरे दिल को याद

एहसान मानेंगे जनम  सात .

  

कौन सी घडी थी

और कौन से थे हालात

जब नजर डूब गई बेहिसाब

जो दिल निकल गया मेरे हाथ .

   

कौन सा था वो दाब

और कौन सी थी बिसात

नजरें समझ न पाई चाल ख़ास

जो भा गया दिल को उनका अंदाज .

 

कौन सा था जादू या

कोई विघन थी साढ़े सात

नजरे कर गई कौन सा फसाद

जो दिल से दिल कर गया मुलाक़ात .

  

दिल पहले था आज़ाद

या अब हुआ है आबाद

दिल में छाया ये कैसा अहसास

दिल लगा न पाया कोई कयास .

 

कर दो दिल को आज़ाद

एहसान मानेंगे जनम  सात .

 

तुम आओ न मेरे दिल को याद

एहसान मानेंगे जनम  सात .

1 टिप्पणी:



  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 1 जुलाई 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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