गुरुवार, 20 जुलाई 2017

आदत सी हो गई है इस दिल को समझाने की ।


अब तो आदत सी हो गई है  इस दिल#dil को समझाने की ।
नहीं होती है मुकम्मिल मंजिल जिंदगी के हर फंसाने की ।
होती है बात पत्थर उछालकर आसमान में छेद कर जाने की।
बातें है बातों का क्या सब बातें है दिल को भरमाने की ।
चार किताब पढ़कर तमन्ना की उन बातों को आजमाने की ।
पर इन सबसे से इतर कुछ और ही दिखी रंगत जमाने की ।
होती रही हर कोशिश हर शख्स को खुश कर अपनाने की ।
मिली है ख़बरें सीधे लोग और सीधे पेड़ को काटे जाने की ।
जमाने में और भी गम है छोड़ दो दीप शिकायतें जिंदगानी की
अब तो आदत सी हो गयी इस दिल को यूँ ही समझाने की।
     

रविवार, 16 जुलाई 2017

बढ़ गयी है दूरियां मेरे ही अपनों से ।


कुछ यूँ ही बढ़ गयी है दूरियां मेरे ही अपनों से ।
जब से गढ़ ली है  दुनिया छोटे बड़े सपनों से ।
जिन रिश्तों ने संभाला था मुझे बड़े जतनों से ।
सब कुछ पाने की आपाधापी में हो गए अनजानों से ।
वक्त नहीं की कर सकूँ खुलकर बातें आसमानों से ।
बस उलझते रहता हूँ कल मिलने वाले परिणामों से ।
वापस लौट आ दीप अब न कर हरकतें नादानों से ।
अब रोक ले , बाहर निकल आ इन बढ़ते अरमानों से ।
काश रुक जाये  रिश्तों का दरकना ऐसे प्रयत्नों से ।
वही  मेरी छोटी सी दुनिया फिर मिल जाये मेरे अपनों से ।

रविवार, 9 जुलाई 2017

गुम है मेघा , रूठी है वर्षा !

ग़ुम हो गए हैं कहां  मेघा , कहां रूठ चली गयी है वर्षा ।
इंतज़ार मैं आँखे सूखी ,  कैसे मिटे तन मन की तृष्णा ।
है नीर बिना ताल सूखा , ना कल कल करे  सरिता ।
ताप्ती हुई है ये धरती,  बिन पानी है सब तरसना ।
है खेतों ने  खोई रौनक , बिलकुल भी चले बस ना ।
उदासी में गुम है प्रकृति , कैसे दुनिया में  गढ़े नई रचना ।
है सबकी यही तमन्ना , सब हिलमिल करे उपासना ।
ऐसा हो दीप करिश्मा,  आकर काले मेघा  लगे बरसना ।

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

डिअर व्हाटसअप/ फेसबुक

डिअर व्हाटसअप/ फेसबुक ,
तुम हर दिन हर पल 24 घंटे मैसेज को बिना रुके एवं बिना थके भेजने और लेने का काम करते हो  । टेक्स्ट , चित्र और ऑडियो वीडियो ,यंहा तक की आजकल  तुम्हे  पीडीएफ और डॉक्यूमेंट फ़ाइल से भी परहेज नही है । सोते जागते आजकल तुम हमेशा हमारे साथ रहने लगे हो , यंहा तक की खाते पीते वक्त एवं कई गैर जरुरी कामों मेँ भी तुम्हारा साथ नही छूट रहा है ।
तुम्हारा और हमारा साथ अभी तक तो बहुत ही खुशनुमा चल रहा था । लेकिन ऑफिस के बॉस के आर्डर वाले मेसेज ने हमारी दोस्ती में दरार डालनी शुरू कर दी है । आजकल तुम्हारे साथ से डर लगने लगा है , जब भी कोई भी घंटी बजती है ना,  तो उलझन में पड़ जाते है की कही बॉस का मेसेज तो नही । सुकून वैसे भी छिनने लगा , अब न तुम्हारे साथ बोरियत भी होने लगी है । अरे क्या ! बार बार एक ही मेसेज लाते रहते हो । तुम इसे रोकते क्यों नही ।
तुम्हारे कारण ना कुछ् नया सोचने की आदत जाने लगी है , बस क्या अच्छा सा बधाई और शुभकामना सन्देश झट से कॉपी पेस्ट कर पोस्ट कर रिश्तों की जिम्मेदारी की इतिश्री करने लगे है । दोस्तों की लिस्ट भी ना , इतनी लम्बी हो गई है की सबके मेसेज देखते देखते गर्दन दर्द होने  लगती है । आँखों और दिमाग पर भी कुछ ज्यादा ही जोर पड़ने लगा है । है भगवान् ! कंही तुम्हारे चक्कर मेँ डॉक्टर के चक्कर न लगाने पड जाये । कुछ भाई लोग तो अपना काम धंदा और पढाई लिखाई छोड़कर बस तुम्हारे चक्कर में अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे है ।
फिर भी अब तो तुम हमारे जीवन का ख़ास हिस्सा बन गए हो । तुमसे दूर तो नही जा सकता , हाँ कोशिश जरूर करूँगा की तुमसे अब कम मिलु ।
तुम्हारा दोस्त : दीप ।

शनिवार, 17 जून 2017

वो उनकी डांट, और रूठना मेरा ।

#happyfathersday
वो बात बात पर उनकी डांट,  और बार बार रूठना मेरा ।
ऐसे ही कई बार शुरू होता , उनका और मेरा  सबेरा ।
कभी मैं गिरता और , उठता उनकी उंगली  पकड़ दुबारा ।
हो कोई बात मनवाना , लेता माँ का इमोशनल सहारा ।
ऐसे होती मेरी कई ख्वाइश पूरी , लगता मैं जीता वो हारा ।
कभी भी मेरा हार जाना , ना होता उनको भी बिलकुल गवारा ।
रात दिन मेहनत कर , करते अपने सुखों और आराम से किनारा ।
बस यही तमन्ना लिए कि , हर ख़ुशी सुख पाये उनका दीप  दुलारा ।
आदरणीय सभी पिताओं को सादर नमन के साथ समर्पित ।
हेप्पी फादर्श डे ।

रविवार, 12 मार्च 2017

पर रंगो की होली खेलें जम से ।

💦न कार धोये पानी के नल से , न पानी नहाये शावर के जल से ।
💥पर रंगो की होली खेलें जम से ।
💦न कुएं खत्म हो घर आँगन से , न तालाब घटे खेत खलिहान  से ।
💥पर रंगो की होली खेलें जम से ।
💦न बहे बारिश का पानी शहरों से , न शहर गांव पटे सीमेंट से ।
💥पर रंगो की होली खेलें जम से ।
💦न पानी बर्बाद हो कारखानो के दोहन से , न पानी प्रदूषित हो उधोगों के विषाक्त जल से ।
💥पर रंगो की होली खेलें जम से ।
💦न जंगल खत्म हो औधोगिकरण से , वन बचे माफियाराज के चुंगल से ।
💥पर लकड़ी की होली जले जम से ।
💦न ईर्ष्या न नशा न हुड़दंग से , मनाएं यह होली सुख शांति और उमंग से ।
💥पर रंगो की होली खेलें जम से ।
🎊शुभ ,समृद्ध , वैभवपूर्ण और अनिष्ट दहन होली की बहुत मंगलकामनाएं और बधाइयाँ ।
💐🙏दी. कु. भानरे एवं परिवार ।

गुरुवार, 26 जनवरी 2017

शुभ और मंगलमय हो दिवस ये गणतंत् ।


💥बड़ी सी आजादी थोडा सा बंधन ,
अधिकारों और कर्तव्यों का हो गठबंधन । 
💥थोड़ी सी मस्ती थोड़ी मनमानी ,
अपनों की खुशियों का न हो अतिक्रमण । 
💥हँसता खिलता रहे जन गण मन ,
अमर रहे मेरे देश का गणतंत्र । 
💥देश के सच्चे सपूतों को शत शत नमन ,
शुभ और मंगलमय हो दिवस ये गणतंत्र ।

🙏🌷जय हिन्द जय भारत । 🌷🙏