शनिवार, 17 नवंबर 2018

आओ संभाल लें रिश्तों को दरकने से पहले !



आओ संभाल  लें  रिश्तों को दरकने से पहले ,
करें एक पहल नजरों में खटकने से पहले।

माना कि कुछ अनबन हो गई हो कभी ,
कुछ अपने रुसवा  हो  गये हो तभी ,
करें एक पहल फासले  मिटायें ,
आओ रूठे हुये अपनों  को मनायें।

गर  दोस्तों से बहुत दिनों से न हो मिले
जीवन की उलझनों में अब तक रहे उलझे ,
क्यों न एक सरप्राइज प्लान बनायें ,
दोस्तों के घर अचानक खुद ही पहुंच जायें ,

एक बार  फिर बच्चों संग बच्चे बन जायें ,
अपना बड़ापन त्याग उनके दोस्त हो जायें ,
शांत घर में खूब धमाचोकड़ी मचायें ,
बड़े छोटे की हदें पार कर जायें ,

माना जीवन की आपाधापी में समय नहीं मिला ,
बड़े बुजुर्गों संग बैठने का रुका सिलसिला ,
आओ दूर कर दें अब उनकी ये गिला ,
उनके  ही आशीर्वाद से जीवन "दीप"  है फलाफूला।

आओ संभाल लें  रिश्तों को दरकने से पहले ,
करें एक पहल नजरों में खटकने से पहले।
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रविवार, 4 नवंबर 2018

दीपों# की जगमग# से है रोशन# सारा जहाँ !


दीपों की जगमग से है रोशन सारा जहाँ ,
सबके त्याग और सहयोग की है सुन्दर दास्ताँ ।
बिन बाती के तेल भी रौशनी दे कहाँ ,
बिन तेल के बाती में लौ जले कहाँ ,
तेल अपनी आप को समर्पित करता यहाँ ,
स्वयं को जला बाती भी रोशन करें जहाँ।
दीपक के बलिदान का भी है अपना हिस्सा ,
लिये तेल और बाती को अपने अंदर समा ,
स्वयं तले अँधेरा रख रोशन करे जहाँ।
शांत सौम्य लौ का भी है अपना किस्सा ,
अठखेलिया कर हवा संग इठलाती यहाँ वहाँ ,
रौद्र रूप हवा ले, लौ पर बन जाती काल समां।
सीधी सादी लौ का भी बढ़ जाता कभी नशा ,
अपने दोनों हाथों से लौ को जो देता सुरक्षा ,
बहक जाये जब हवा संग तो हाथ भी देती जला।

कीट पतंगों का भी देखो है अदभुत नाता ,
रौशनी के प्रेम में खिचे चले आते नादाँ ,
हो सके न एक दूजे के तो हो जाते क़ुरबाँ ।

किंतना उलझा हुआ है "दीप " सबका यह नाता ,
फिर भी मिलजुलकर सब बनाते खुशनुमा जहाँ। 

सुख समृद्धि और खुशियों की कोटिशः शुभकामनायें
शुभ और मंगलमय दीपावली । 

आओ संभाल लें रिश्तों को दरकने से पहले !

आओ संभाल  लें  रिश्तों को दरकने से पहले , करें एक पहल नजरों में खटकने से पहले। माना कि कुछ अनबन हो गई हो कभी , कुछ अपने रुसवा ...