गुरुवार, 27 नवंबर 2008

शोक ! शोक !! शोक !!!


आज टिपण्णी
नहीं साथ चाहिये ।
इस चित्र को अपने ब्लॉग
पोस्ट मे डाले और साथ दे ।

एक दिन हम सब
सिर्फ़ और सिर्फ़
हिन्दी ब्लॉग पर अपना
सम्मिलित आक्रोश व्यक्त करे !
प्रेरणा और चित्र
सीमा गुप्ता जी और रामपुरिया जी के ब्लॉग से
आभार सहित !

5 टिप्‍पणियां:

अशोक मधुप ने कहा…

वह मौका शाक का नही है। युद्ध का है...
समर शेष है नही हिंस्त्र का दोषी केवल व्याघ,
जो तटस्थ है समय लिखेगा अपना भी अपराध।

राज भाटिय़ा ने कहा…

हार्दिक श्रद्धांजली मेरे उन शहीद भाईयो के लिये जो हमारी ओर हमारे देश की आबरु की रक्षा करते शहीद हो गये।लेकिन मन मै नफ़रत ओर गुस्सा अपनी निकाम्मी सरकार के लिये

seema gupta ने कहा…

" आज शायद सभी भारतीय नागरिक की ऑंखें नम होंगी और इसी असमंजस की स्थति भी, हर कोई आज अपने को लाचार बेबस महसूस कर रहा है और रो रहा है अपनी इस बदहाली पर ..."ईश्वर मारे गए लोगों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें . उनके परिजनों को दु:ख सहने की ताकत दें .

रचना ने कहा…

अपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

आपका यह अनुकरणीय प्रयास है ! इस महान दुःख की घडी में शहीदों को श्रंद्धांजलि !