सोमवार, 24 जून 2019

ये #वहम अच्छे हैं !



                                                                          चित्र गूगल साभार

ये वहम अच्छे हैं !
जब तक अपनों के चेहरे पर  मिले मुस्कान ,
और मुँह में मिले  हो शहद सी मीठी जुबान ,
भ्रम के बादलों से ढँका है रिश्तों का असमान ,
तो तब तक जीने के लिये ये वहम अच्छे हैं .

जब तक जीवन में भरे हुये हैं खुशियों के बारदान ,
और सुखमय जीवन में मिल रह सबका योगदान ,  
अभी तक हुयी नहीं मुश्किलों में अपनों की पहचान,
 तब तक जीने के लिये ये वहम अच्छे हैं .

अभी तक नहीं दिखा डिगा हुआ ईमान ,
लगता दामन कोरे कपड़े के समान ,
जब तक बंद है दरवाजा ए हमाम ,  
 तब तक जीने के लिये ये वहम अच्छे हैं .

सब कहते हैं कि झूठ और फरेब है हराम ,
सहूलियतों के हिसाब से चले रहे है सब काम ,
जब तक कामों का मिल रहा है अच्छा परिणाम ,
तब तक जीने के लिये ये वहम अच्छे हैं .

अपनों से परे अपनी दुनिया बना रहा है इंसान ,
जुटा रहा है सुख सुविधाओं के सारे समान ,
दौड रही है “दीप” जीवन की गाड़ी बेलगाम ,
तब तक जीने के लिये ये वहम अच्छे हैं .

4 टिप्‍पणियां:

संजय भास्‍कर ने कहा…

सुंदर शब्दों के साथ…. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति….

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

भास्कर जी , आपकी बहुमुल्य टिप्पणी के लिये बहुत शुक्रिया .

VIJAY KUMAR VERMA ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

वर्मा जी आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद ।

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