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शनिवार, 27 नवंबर 2021

देखना एक दिन #पछताओगे ।


यूं  न #उलझा करो मुझसे एक दिन पछताओगे ।

देखना किसी दिन #दिल अपना मेरे हवाले कर जाओगे ।


ढूंढते हो मुझसे बार बार मिलने के बहाने ,

बनाते हो गलियों को मेरी अपने ठिकाने ,

देखना इन्हीं ठिकानों पर दिल अपना अटका पाओगे ।


मिलाते हो नज़रें मुझसे कितने दफा न जाने ,

आते ही करीब मेरे बार बार मदद के बहाने ,

देखना इन्हीं दफाओं में खुद को उलझा पाओगे ।


करते रहते हो तारीफ मेरी यूं ही मुझे  रिझाने ,

लाते हो बार बार नजराने मेरी मुस्कुराहटें पाने ,

देखना इन सुकुनों में खुद को बे सुकून पाओगे ।


लड़ जाते हो किसी से भी बिना कोई बात जाने,

आ जाते हो कभी भी मेरी जिम्मेदारियां उठाने ,

देखना किसी दिन खुद मेरी जिम्मेदारी बन जाओगे ।


ये दिल भी लगा है अब तो तुम्हारे ख्वाब सजाने,

ढूंढने लगे है अब तो  मिलने के बहाने ,

ये बताओ दिल दीप अपना कब मेरे नाम कर जाओगे ।


यूं  न उलझा करो मुझसे एक दिन पछताओगे ।

देखना किसी दिन दिल अपना मेरे हवाले कर जाओगे ।

16 टिप्‍पणियां:

Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार
(28-11-21) को वृद्धावस्था" ( चर्चा अंक 4262) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
--
कामिनी सिन्हा

RaviKant Soni ने कहा…

Bahut badhiya sarji :-)

Jigyasa Singh ने कहा…

सुंदर,सरस भावपूर्ण रचना ।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय कामिनी मेम मेरी प्रविष्टि को चर्चा अंक 4262) पर शामिल करने के लिए बहुत धन्यवाद एवं आभार ।
सादर ।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय रवि सर एवं जिज्ञासा मेम , आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद ।
सादर ।

SANDEEP KUMAR SHARMA ने कहा…

वाह...। बहुत खूब

Onkar ने कहा…

सुंदर रचना

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय संदीप सर एवं ओंकार सर , आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद ।
सादर ।

Nitish Tiwary ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय नीतीश सर , आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद ।
सादर ।

Manisha Goswami ने कहा…

अतिसुन्दर

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय मनीषा मेम , आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद ।
सादर ।

Sudha Devrani ने कहा…

करते रहते हो तारीफ मेरी यूं ही मुझे रिझाने ,

लाते हो बार बार नजराने मेरी मुस्कुराहटें पाने ,

देखना इन सुकुनों में खुद को बे सुकून पाओगे ।
वाह!!!
लाजवाब सृजन।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय सुधा मेम , आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद ।
सादर ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना ...
भावपूर्ण और दिल को चूने वाले भाव ...

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय नासवा सर , आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद ।
सादर ।