रहेगी ख़यालों में
जब तक तुम्हारी टहल
बहलता रहेगा
तब तक ये दिल ।
अकेला न हुआ कभी
सूनेपन भरे रहे सभी
जब तक है यादों में
तुम्हारी ही हलचल ।
गम ने बनाई दूरियाँ
उदासी न करे अठखेलियाँ
खुशियाँ लिख रही
अब तो नयी गजल ।
सुकून न रहा विदा कभी
बहती रही राहत की नदी
अब तो कुछ ऐसे ही
मन में है चहल ।
सूरत आँखों में है बसी
मन में समाई है हंसी
अब तो ऐसे ही
मन रहा है बहल .
याद बने अब हकीकत
रहो साथ अब हर वक्त
अब तो आकर सदा के लिये
मेरी जिदंगी दो बदल .
रहेगी ख़यालों में
जब तक तुम्हारी टहल
बहलता रहेगा
तब तक ये दिल ।
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