वक्त के हर लम्हे
लगते है अब कातिल
हो ना जब तक हमें
साथ तुम्हारा हासिल .
लगता नहीं है दिल
लहरें पाती नहीं साहिल
गम के समन्दर में तुफान उठाने
हो जाती है अब तन्हाई भी शामिल .
वक्त के हर लम्हे
लगते है अब कातिल
हो ना जब तक हमें
साथ तुम्हारा हासिल .
तारे आकाश के गिन गिन
निकली रातें काली कठिन
दिन भी बना रहा बोझिल
सजा लेती है उदासियों भी महफ़िल .
वक्त के हर लम्हे
लगते है अब कातिल
हो ना जब तक हमें
साथ तुम्हारा हासिल .
दीवारे बन गयी है दोस्त
दरवाजे खड़े है रास्ता रोक
रौशनी को है खिड़की की टोक
सहलाता है अब अँधेरा भी दिल .
वक्त के हर लम्हे
लगते है अब कातिल
हो ना जब तक हमें
साथ तुम्हारा हासिल .
