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शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

वक्त के हर लम्हे लगते है अब कातिल .

 


वक्त के हर लम्हे

लगते है अब कातिल

हो ना जब तक हमें

साथ तुम्हारा हासिल .

 

लगता नहीं है दिल

लहरें पाती नहीं साहिल

गम के समन्दर में तुफान उठाने

हो जाती है अब तन्हाई भी शामिल .

 

वक्त के हर लम्हे

लगते है अब कातिल

हो ना जब तक हमें

साथ तुम्हारा हासिल .

 

तारे आकाश के गिन गिन

निकली रातें काली कठिन

दिन भी बना रहा बोझिल

सजा लेती है उदासियों भी महफ़िल .


वक्त के हर लम्हे

लगते है अब कातिल

हो ना जब तक हमें

साथ तुम्हारा हासिल .

 

दीवारे  बन गयी है दोस्त

दरवाजे खड़े है रास्ता रोक

रौशनी को है खिड़की की टोक

सहलाता है अब अँधेरा भी दिल .

 

वक्त के हर लम्हे

लगते है अब कातिल

हो ना जब तक हमें

साथ तुम्हारा हासिल .

वक्त के हर लम्हे लगते है अब कातिल .

  वक्त के हर लम्हे लगते है अब कातिल हो ना जब तक हमें साथ तुम्हारा हासिल .   लगता नहीं है दिल लहरें पाती नहीं साहिल गम के समन्दर ...