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मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

महिला उन्नति का मार्ग पब , पाश्चात्य और लिव इन रिलेशन जैसी संस्कृति से गुजरता है .

देश मैं जब कभी - कंही भी मंगलोर जैसी घटना घटित होती है तो घटना के विरोध मैं कई स्थापित एवं स्वघोषित महिला हितों के हिमायती लोग और संगठन , धार्मिक संगठन एवं धर्म के ठेकदारों की तरह आगे आते रहते है । जो की एक अच्छी बात है । किंतु यह विरोध घटना के विरोध तक सीमित न रहकर महिला हितों की आड़ मैं अनैतिक और अमर्यादित कार्यों का समर्थन करते नजर आते हैं । अब देखिये न केंद्रीय महिला मंत्री महोदया घटना के विरोध कुछ इस प्रकार से कह कर रही है की वैलेंटाइन डे के दिन देश मैं अधिक से अधिक युवा और युवातीयां पब मैं जाएँ और पब को भर दें और जितनी मर्जी आए शराब पियें । ठीक इसी प्रकार अन्य तथाकथित और स्वघोषित महिला हितों के हिमायती लोग अपनी अपनी तरह से घटना के विरोध के समर्थन मैं उठ खड़े हुए हैं ।


मंगलोर मैं लोगों के किरियाकलापों से असहमति और विरोध जताने का जो तरीका अपनाया गया है वह निंदनीय है और किसी भी तरह से उचित नही ठहराया जा सकता है किंतु इस विरोध की आड़ मैं जो काम ग़लत है उसे बढ़ावा तो नही दिया जा सकता है फ़िर चाहे वह महिला करे या पुरूष । ग़लत काम तो ग़लत होता है । यदि शराब पीना ग़लत है तो ग़लत है । ठीक इसी तरह से महिला आजादी और हितों के नाम पर पाश्चात्य और लिव इन रिलेशन शिप जैसी संस्कृति का समर्थन करते लोग नजर आते हैं । और कहते है की महिलाओं की आजादी पर कुठाराघात है । लोग महिलाओं को बढ़ते हुए नही देखना चाहते हैं महिलाएं भी पुरूष के समान जीना चाहते है । क्या महिला उन्नति का मार्ग पब , पाश्चात्य और लिव इन रिलेशन जैसी संस्कृति से होकर गुजरता है .


जब मंगलोर जैसी घटना घटित होती है तो महिला हितों के समर्थन मैं कई लोग और संघठन खड़े नजर आते हैं जो की अच्छी बात है किंतु यदि ऐसी ही महिला हितों के समर्थन मैं गतिविधियाँ और क्रियाकलाप देश मैं लगातार घट रही कन्या भ्रूण हत्या , दहेज़ प्रथा और अन्य रुदिवादी घटना और महिला प्रताड़ना से सम्बंधित घटना पर जारी रखें तो कितना बेहतर होगा । क्यों नही ऐसे चिकित्सक और क्लिनिक के ख़िलाफ़ आन्दोलन छेड़ते ? क्यों नही दहेज़ की बलि बेदी पर चढ़ती बहुओं के समर्थन मैं आगे आते ? अपने घर की महिलाओं के साथ घर के पुरूष सदस्यों के समान व्यवहार हो । घर की बहु बेटियों के साथ एक समान व्यवहार हो , बेहतर सिक्षा और स्वस्थ्य की व्यवस्था हो - ऐसा आन्दोलन और सतत प्रयास जारी हो , बजाय महिला उन्नति , आजादी और हितों के समर्थन के नाम पर पब , पाश्चात्य और लिव इन रिलेशन जैसी संस्कृति का समर्थन करने के ।

कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

  कर दो दिल को आज़ाद एहसान मानेंगे जनम   सात .   तुम आओ न मेरे दिल को याद एहसान मानेंगे जनम   सात .     कौन सी घडी थी और कौन से...