कर दो दिल को आज़ाद
एहसान मानेंगे जनम सात .
तुम आओ न मेरे दिल को याद
एहसान मानेंगे जनम सात .
कौन सी घडी थी
और कौन से थे हालात
जब नजर डूब गई
बेहिसाब
जो दिल निकल गया मेरे हाथ .
कौन सा था वो दाब
और कौन सी थी
बिसात
नजरें समझ न पाई
चाल ख़ास
जो भा गया दिल को उनका अंदाज .
कौन सा था जादू
या
कोई विघन थी साढ़े
सात
नजरे कर गई कौन
सा फसाद
जो दिल से दिल कर गया मुलाक़ात .
दिल पहले था आज़ाद
या अब हुआ है आबाद
दिल में छाया ये कैसा अहसास
दिल लगा न पाया कोई कयास .
कर दो दिल को आज़ाद
एहसान मानेंगे जनम सात .
तुम आओ न मेरे दिल को याद
एहसान मानेंगे जनम सात .

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Clickhere to comment in hindi