घाव दे जाते हो कितने ऐ कातिल ,
कि गुजरते है लम्हे कई होने में फिल,
मिलकर बिछड़ने से डरता है ये #दिल ,
इसलिए तो मिलने की #आरजू की है किल।
तूफान सा उठता है टूटते है #साहिल ,
अहसासों की आग होती नहीं चिल,
#दीदार की #खुशी में होंठ जाते है सिल,
सोचे ख्याल सारे हो जाते है निल।
मिलकर जो तुमसे हुआ था #हासिल ,
बिछड़कर तुमसे लगता है सब निल,
बढ़ जाता है कुछ और ही दर्दे दिल ,
इसलिए तो मिलने की आरजू की है किल।
****"दीप"क कुमार भानरे****
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