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रविवार, 12 फ़रवरी 2023

मिलने की #आरजू की है किल।



घाव दे जाते हो कितने ऐ कातिल ,

कि गुजरते है लम्हे कई होने में फिल,

मिलकर बिछड़ने से डरता है ये #दिल ,

इसलिए तो मिलने की #आरजू की है किल।


तूफान सा उठता है टूटते है #साहिल ,

अहसासों की आग होती नहीं चिल,

#दीदार की #खुशी में होंठ जाते है सिल,

सोचे  ख्याल सारे हो जाते है निल।


मिलकर जो तुमसे हुआ था #हासिल ,

बिछड़कर तुमसे लगता है सब निल,

बढ़ जाता है कुछ और ही दर्दे दिल ,

इसलिए तो मिलने की आरजू की है किल।

                  ****"दीप"क कुमार भानरे****

कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

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