काम बनाने की लोग
कोशिश में अपनी ,
चलाते है जब तब
#झूठ की #मथनी ।
#हांडी #काठ की तो
एक बार ही पकनी ,
#कलई झूठ की तो
है कभी तो उतरनी ।
#दाढ़ी #चोर की जिस दिन
है तिनके संग मिलनी ,
गड़े #मुर्दे की तब
है #मिट्टी निकलनी ।
सच से झूठ को
फिर मिलेगी पटकनी ,
छुपाने को मुंह फिर
कहां जगह है बचनी ।
अंतर में मिलेगी जिसके
करनी और कथनी ,
जमाने में कैसे फिर
वो होगा विश्वसनीय ।
****"दीप"क कुमार भानरे****
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