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रविवार, 19 फ़रवरी 2023

वो होगा विश्वसनीय ?


काम बनाने की लोग 

कोशिश में अपनी ,

चलाते है जब तब

#झूठ की #मथनी ।


#हांडी #काठ की तो

एक बार ही पकनी ,

#कलई झूठ की तो

है  कभी तो उतरनी ।


#दाढ़ी #चोर की जिस दिन 

है तिनके संग मिलनी ,

गड़े #मुर्दे की तब 

है #मिट्टी निकलनी ।


सच से झूठ को 

फिर मिलेगी पटकनी ,

छुपाने को मुंह फिर

कहां जगह है बचनी ।


अंतर में  मिलेगी जिसके

करनी और कथनी ,

जमाने में कैसे फिर 

वो होगा विश्वसनीय ।

                ****"दीप"क कुमार भानरे****

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