माना अभी #जद में थोड़ा न है ,
#घर अपना आज ,
फिर भी गर संभल गये ,
कहीं उठते #धुयें को #भांप ।
खोद लिया एक #कुंआ गर ,
खतरे का कर आभास ,
शायद उस वक्त काम आये ,
जब अपने तक आये #आंच ।
गर करते नहीं #नजरंदाज ,
जो कुछ हो रहा आसपास,
तो मंसूबे सफल न होंगे ,
जो फैलाने वाले हैं आग ।
शायद एक हद बन जाये,
और एक सुरक्षा आकाश,
फिर शायद #जद में न होंगे,
अपना घर और आसपास ।
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