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रविवार, 30 जनवरी 2022

न किया कोई लड़ाई है !

 


न किया कोई लड़ाई है , 

न फरमाइश की लिस्ट लाई है ,

यह कोई समझौता की समझ है ,

या कोई नाराजगी समाई है ।


इस खामोशी ने बैचेनी बढ़ाई है ,

बड़ी दुविधा की स्थिति अाई है ,

यह तूफान के पहले की शांति है ,

या सच में ठंडी हवा की पुरवाई है ।


मनको गवारा नहीं ऐसा तुम्हारा रूप,

कभी झगड़ना तो कभी जाना रूठ ,

कभी छांव बनना तो कभी बनना धूप ,

अच्छा लगता है वही तुम्हारा रसूख ।


अब नाराजगी की करो जी विदाई है ,

यदि समझ है तो बरतो थोड़ी ढिलाई है ,

फरमाइश की  बजाओ वही शहनाई है ,

और फिर कर लो थोड़ी लड़ाई है ।

 

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