#नाकामियों पर अपनी ,
यूं #तकदीर की चादर ओढ़ाया न करो ,
#खामियों से अपनी ,
यूं रिश्तेदारी की रस्म निभाया न करो ।
माना की बड़ा मुश्किल है ,
झांकना खुद के अंदर ,
यहां पसंद है किसे ,
कहलाना हार का सौदागर,
चाहत है गर दिल में ,
कामयाबी भरा हो सफर ,
ऐसे भंवर में कभी ,
खुद को उलझाया तो करो ।
एक ढूंढो हजार मिलेंगे ,
खामियां के भरमाते जाल,
चलते हुये न जाने ,
कैसी कैसी शतरंजी चाल,
चाहत है गर दिल में ,
बनने की बाजीगर ,
इस शह और मात के खेल में ,
हराने इन्हें जरा आया तो करो ।
गर रखी है खुद में ,
काबिलियत और हुनर ,
धधकने दो ज्वाला ,
जिद और जुनून की अंदर ,
वादा करें खुद से की,
बाकी न रहेगी कोई कसर ,
कभी ऐसे भी जाल जीत का,
जरा खुद के लिए बिछाया तो करो ।
नाकामियों पर अपनी ,
यूं तकदीर की चादर ओढ़ाया न करो ,
खामियों से अपनी ,
यूं रिश्तेदारी की रस्म निभाया न करो ।
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