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रविवार, 15 जून 2025

सीने में #रात के #चिंगारी का ऐसा #खंजर चुभाओ !


जितना न लिखा हो किस्मत में अपनी

कुछ उससे ज्यादा ही पाने की जुगत लगाओ

गर आया पसंद आसमां में कोई सितारा

तो टूटकर झोली में गिरने तक  नजर न हटाओं  .

 

सुलझी नहीं है गुत्थियाँ जो अब  तक

सुलझाने को उनको अपना मन बनाओं

जबाब जिसका किसी के पास न हो

ऐसे  प्रश्न के उत्तर पर अपन दिमाग खपाओ .

 

न होने दो रात को इतनी ज्यादा लम्बी

की आगोश में उसके नींद सुकून पा जाये

झपके कुछ इस तरह से अपनी  पलकें

की आँखें बस कुछ पल ही सुकून पाये .

 

सीने में रात के चिंगारी का ऐसा खंजर चुभाओ

की बस्तियां अँधेरे की जलकर खाक हो जाये

फिर उम्मीद के उजाले का एक नया घर सजाओ

जहाँ मुसाफिर मंजिलों के ठहर विश्राम पाये .  


कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

  कर दो दिल को आज़ाद एहसान मानेंगे जनम   सात .   तुम आओ न मेरे दिल को याद एहसान मानेंगे जनम   सात .     कौन सी घडी थी और कौन से...