रविवार, 17 दिसंबर 2017

#कम न हो #नये की #चाहत ।।


#कम न हो #नये की #चाहत ।।
कुछ अलग और नये की चाहत , पुराने से ऊबने और उबरने की चाहत । 
तो कर गुजरते है कुछ अलग ,मिलती तसल्ली और होती है राहत ।
छूटते है अपने और  होते आहत , कुछ टुटता है बिखरती है सहूलियत । 
जब चल पड़ते करने को कुछ अलग ,होती है ख़ुशी हर लम्हा सुखद । 
उड़ती है नींदे होती कड़ी मेहनत ,बढ़ती दुस्बारियाँ बिगड़ती है सेहत ।
तन मन की लगती है लागत ,लगती राहें आसान हर पल खूबसूरत । 
चलते रहें  न हो कहीं थकावट , कुछ परेशानी कुछ तो होगी रूकावट ।
कम न हो नये 'दीप' की चाहत ,यही तो जीवन का फलसफा है शायद ।

कोई टिप्पणी नहीं:

दीपों# की जगमग# से है रोशन# सारा जहाँ !

दीपों की जगमग से है रोशन सारा जहाँ , सबके त्याग और सहयोग की है सुन्दर दास्ताँ । बिन बाती के तेल भी रौशनी दे कहाँ , बिन तेल के बाती...