मंगलवार, 26 जनवरी 2021

सजाने को मेरे देश की धरती !


 सजाने को मेरे देश की धरती ,

कायनात हर रोज उतरती ।


नदियां , झरने और सरोवर ,

निर्मल जल से करते कल कल ,

फसलें सुनहरी हरे भरे वन से ,

देश धरा श्रृंगार है करती  


चांद सितारों का उजियारा ,

करते दूर निशा अंधियारा ,

रवि किरणें हर सुबह आकर,

भारत मां के चरण चूमती ।


अलग अलग सब धरम के बंदे ,

ये सब है एक माला के मनके ,

रंग बिरंगे जन गण धन से ,

भारत मां की गोद है भरती ।


धूल धरा माथे में लगाकर ,

हल्दी कुमकुम थाल सजाकर ,

देशभक्ति का दीप जलाकर ,

भारत मां की करें आरती ।


सजाने को मेरे देश की धरती ,

कायनात हर रोज उतरती ।


गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयां एवं ढेरों शुभकामनाएं । 

जय हिन्द , जय भारत । 

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर।
72वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

धन्यवाद सर । आपको भी गणतंत्र दिवस बहुत शुभकामनाएं ।