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शनिवार, 29 मार्च 2025

बड़ा ही #विशेष था #शुभ #मुहूर्त (#muhurt) ।

बड़ा ही विशेष था शुभ मुहूर्त

कि जुड़ा था ये मन उनसे अटूट ।

 

धरा में थी हल्की भोर की धूप

और बयार थे शीतलता से अभिभूत ।

 

करती निनाद मंदिर की घंटियाँ

ईश्वर कृपा के मन से हो  वशीभूत

अर्चना और प्रार्थना के उच्चारण से

बने थे  होंठ ईश्वर के  देवदूत ।

 

श्रद्धा और सुकून की दौलत

समेटने को बिखरी थी अकूत ।

 

बागों में छेड़ रही थी तान  

मधुर कोयल की कूक

और मची हुयी थी मधुमाखियाँ में

पराग कण को पीने की लूट ।

 

भँवरे और तितलियाँ के दल  

मंडरा रहे थे फूलों पर खूब ।

 

जब रात से मिलने सूरज   

आसमां में रहा था डूब

अपने अपने घरों की और

पंछी भी कर रहे थे कूच ।

 

पाकर चाँद तारों का  सानिध्य

आसमां भी पा लिये थे नये रूप ।

 

बड़ा ही विशेष था शुभ मुहूर्त

कि जुड़ा था ये मन उनसे अटूट ।

                                *** "दीप"क कुमार भानरे *** 

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में मंगलवार 01 अप्रैल 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय , इस रचना को "पांच लिंकों के आनन्द मंगलवार 01 अप्रैल 2025 को लिंक http://halchalwith5links.blogspot.in पर शामिल करने के लिए बहुत धन्यवाद । सादर ।

      हटाएं
  2. उत्तर
    1. आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी हेतु , बहुत धन्यवाद सर ।

      हटाएं
  3. सुन्दर प्रकृति विचरण :-)

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी बहुमूल्य टिप्पणी हेतु , बहुत धन्यवाद सर ।

    जवाब देंहटाएं

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बड़ा ही विशेष था शुभ मुहूर्त कि जुड़ा था ये मन उनसे अटूट ।   धरा में थी हल्की भोर की धूप और बयार थे शीतलता से अभिभूत ।   करती निना...