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बुधवार, 7 अक्टूबर 2020

अश्क आंखों से यूं गिराया न करो !



 अश्क आंखों से यूं गिराया न करो ,

गम के समंदर में दुनिया  डुबाया न  करो ,

बमुश्किल से आती है साहिल पर कश्ती जिंदगी की ,

तूफान उठाकर यूं भंवर में उलझाया न करो ।


माना कि हर आरज़ू को मिलती नहीं मंजिल ,

हालात होते है तमन्नाओं के कत्ल में शामिल , 

हर हादसे पर यूं आहत न हो जाया करो , 

अश्क आंखों से यूं गिराया  न करो । 


सजाया न करो जख्म ए दिल अश्कों की दुकान में ,

मरहम तो होता नहीं , होता है नमक लोगों की जुबान में ,

थोड़ा मुस्कुरा कर हाले दिल जमाने से छुपाया भी करो  , 

अश्क आंखों से यूं गिराया न  करो ।


झांक भी लिया करो हसरतों की इमारतों से बाहर ,

मिल जाएंगे खुदा का शुक्रिया करते जो मिला उसके लिये ,

कभी अपने दिल की ऐसे भी समझाया करो , 

अश्क आंखों से यूं गिराया न  करो ।


अश्क आंखों से यूं गिराया न  करो ,

थाम कर इन्हें अपनी ताकत बनाया करो  ,

बमुश्किल से आती है साहिल पर कश्ती जिंदगी की , 

यूं तूफान उठाकर भंवर में  उलझाया न करो ।

                                      ******दीप******

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