अश्क आंखों से यूं गिराया न करो ,
गम के समंदर में दुनिया डुबाया न करो ,
बमुश्किल से आती है साहिल पर कश्ती जिंदगी की ,
तूफान उठाकर यूं भंवर में उलझाया न करो ।
माना कि हर आरज़ू को मिलती नहीं मंजिल ,
हालात होते है तमन्नाओं के कत्ल में शामिल ,
हर हादसे पर यूं आहत न हो जाया करो ,
अश्क आंखों से यूं गिराया न करो ।
सजाया न करो जख्म ए दिल अश्कों की दुकान में ,
मरहम तो होता नहीं , होता है नमक लोगों की जुबान में ,
थोड़ा मुस्कुरा कर हाले दिल जमाने से छुपाया भी करो ,
अश्क आंखों से यूं गिराया न करो ।
झांक भी लिया करो हसरतों की इमारतों से बाहर ,
मिल जाएंगे खुदा का शुक्रिया करते जो मिला उसके लिये ,
कभी अपने दिल की ऐसे भी समझाया करो ,
अश्क आंखों से यूं गिराया न करो ।
अश्क आंखों से यूं गिराया न करो ,
थाम कर इन्हें अपनी ताकत बनाया करो ,
बमुश्किल से आती है साहिल पर कश्ती जिंदगी की ,
यूं तूफान उठाकर भंवर में उलझाया न करो ।
******दीप******
