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शनिवार, 3 दिसंबर 2022

चलूं जहां मैं #पांव पांव ।


वो अपनी गली और अपना गांव ।

चलूं  जहां  मैं #पांव पांव ।


गुजरूं मैं गली से तो धूल लगे ,

गर्मी में चटक दोऊ पैर जले ,

बारिश के कीचड़ में सने पांव ।....


जमीं पर बिखरे बेर समेटू ,

अमरूद पर मैं उछल कर पहचूं,

पाने लगाऊं हर एक दांव । ....


मूंगफली जमीं से लूं मैं उखाड़ ,

तोड़ूं चने की मैं खेत से डार,

भूनूं  मैं इनको जला अलाव । ....


धार नदी की पैर से रोकूं,

अंजुली में मछली लाने सोचूं ,

गोरे हो गये भीगे भीगे पांव ।....


पंछी के दल जहां शोर मचायें,

काम से थककर जहां सुस्तायें ,

पेड़ों की ऐसी ठंडी ठंडी छांव ।....


भागदौड़ की ऐसी आंधी आई ,

सब अठखेलियां हुई पराई ,

सपना हुई ऐसी चाहत की नाव । ....


वो अपनी गली और अपना गांव ।

चलूं  जहां मैं पांव पांव ।

कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

  कर दो दिल को आज़ाद एहसान मानेंगे जनम   सात .   तुम आओ न मेरे दिल को याद एहसान मानेंगे जनम   सात .     कौन सी घडी थी और कौन से...