सोमवार, 12 मई 2008

जल सरंक्षण - हम और हमारी सरकार !

हर गर्मी की तरह इस बार भी पानी की समस्या कुछ ज्यादा गंभीर बनकर सामने आई है । देश का हर आदमी इस जल समस्या को लेकर आक्रोशित और चिंतित नजर आ रहा है । इस पर जगह जगह प्रदर्शन हो रहे है । लोग सरकार और स्थानीय स्तर की संस्थाओं को बिना पानी पिए कोष रहे हैं . पानी के लिए लड़ाई झगडे और लूट की बार्दात को भी अंजाम दिया जा रहा है . किंतु यह सब आक्रोश और चिंता सिर्फ़ गर्मी के मौसम तक ही रहती है और मौसम बदलते ही सब भूलकर अपने जीवन की जद्दोजहद मैं मशगूल हो जाते हैं ।
अमूल्य और प्रकृति प्रदत्त इस जल को न तो कृत्रिम रूप से बनाया जा सकता है और न ही सरकार के पास जादू की छड़ी है की जिसको घुमाकर पानी पैदा किया जा सकता है . फिर भी जितनी बारिस होती है उतने ही पानी के किफायती उपयोग और सरंक्षण के प्रति हमेशा सजग रहे तो , संभवतः आने वाली गर्मी मैं पानी की समस्या उत्पन्न ही न हो । अतः कुछ छोटी छोटी बातों को ध्यान मैं रखकर हम जल सरंक्षण और किफायती उपयोग के प्रति अपनी सजगता दिखा सकते हैं . जैसे पीने हेतु और रसोई के कार्यों हेतु जितनी जरूरत हो उतना ही पानी लेवे . कपड़े धोने मैं कम पानी का इस्तेमाल और सही ड्टर जेंट का चुनाव करे . वाहनों और अन्य सामानों के धोने हेतु सीधे जल स्त्रोत का प्रयोग न कर पानी को अलग पत्र मैं लेकर उपयोग किया जाए . बागिचों और खेतों मैं भी अव्शयाकता अनुरूप पानी दिया जावे . आवश्यकता न होने पर जल स्त्रोतों को बंद कर देवें . घर की खाली जगहों मैं जल सोखता गद्दों को बनाया जावे जिससे वर्षा का जल जमीन के अन्दर जा सके . जंहा तक हो सके घरों मैं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाया जावे . ये तो हुई हमारी बात ।
सरकार को भी चाहिए की खाली पड़ी बंजर और किसानों की अनुपयोगी भूमि को अपने हाथ मैं लेकर उनमे तालाब खुदवाये ताकि वर्षा के जल को रोका जा सके . इन तालाबों को मत्स्य पालन और अन्य जलीय खाद्य पदार्थ को उगाकर और संचित जल को सशुल्क सिंचाई हेतु प्रदाय कर आर्थिक लाभ प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया जावे . सभी शासकीय और निजी संस्थाओं के भवनों मैं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना अनिवार्य किया जावे . जल सरंक्षण उपायों को अपनाने हेतु आर्थिक सहायता दी जावे . बड़े उद्योगों द्वारा पानी के उपयोग की एक सीमा तय की जावे . प्राकृतिक जल स्त्रोतों जैसे नदी , झीलों , झरनों को प्रदूषित और असुरक्षित होने से बचाया जाए . कृत्रिम जल स्त्रोतों तालाबों , बाब डियों , कुएं इत्यादी की साफ सफाई और गहरीकरण कर जीर्नोधार किया जावे . इन सभी कार्यों मैं निजी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा सकता है । स्कूलों और कॉलेज पाठ्यक्रमों मैं जल सरक्षण जैसे विषय को शामिल किया जावे ।
अतः हम इन बातों को अपनाकर और सरकार अपनी नीतियों मैं इन बातों को प्राथमिकता से शामिल कर जल सरक्षण के प्रयासों के प्रति हमेशा सजग रहेंगे । आशा है की आने वाली गर्मी मैं लोगों को और सरकार को इस समस्या से जूझना नही पड़ेगा .

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