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सोमवार, 3 नवंबर 2008

कहाँ गए महिला हितों के हिमायती संगठन .

देश मैं जब भी कोई महिला पर अत्याचार या प्रताड़ना की घटना सामने आती है तो देश के कई महिला हितों की हिमायती संघटन उनके समर्थन सामने आते हैं । और जगह जगह विभिन्न प्रकार से महिलाओं की हितों की रक्षा के सन्दर्भ मैं सड़कों पर जुलुश और धरनों के माध्यम और अन्य प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार , प्रशासन और देश के लोगों के सामने अपनी बात रखते हैं । किंतु माले गाँव धमाके के सिलसिले मैं महाराष्ट्र की कांग्रेसी सरकार की पुलिस एटीएस द्वारा कथित प्रग्या ठाकुर के मामले अभी तक कोई महिला हितों के तथाकथित हिमायती संघठन सामने नही आए हैं । जबकि उसके ख़िलाफ़ अभी तक कोई ठोस सबूत पुलिस एटीएस को नही मिले हैं । और तो और जो नार्को टैस्ट और ब्रेन मैपिंग कराया गया उसमे भी बम धमाके मैं शामिल होने के कोई ठोस प्रमाण नही मिले हैं । आख़िर क्यों आज एक महिला को देश मैं इस तरह आरोपित होकर प्रताडित और अपमानित होना पड़ रहा है ।
संभवतः इसलिए की उसका सम्बन्ध किसी अल्प संख्यक अथवा नॉन हिंदू वर्ग से नही है । शायद इसलिए की वह एक बहुसंक्यक समुदाय से हैं । प्रायः देखने मैं यह आ रहा है वोट बैंक के लालच मैं राजनीति दल और राजनेता एवं थोथी प्रसद्धि और टी आर पि बढ़ाने की होड़ एवं छदम धर्मं निरपेक्षता की आड़ मैं बहुसंख्यक समुदाय को ही कटघरे मैं खड़ा करने की कोशिश की जाती है । दूसरे समुदाय के दुःख दर्द और किसी दुर्घटना पर तो देश मैं हाय तौबा मचने लगती है किंतु जब बहुसंक्यक समुदाय की बात आती है तो उससे आँख मूंदने और उससे नजरें चुराने की कोशिश की जाती है ।
और ऐसा ही अब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के मामले मैं हो रहा है । जब नार्को टैस्ट और ब्रेन मैपिंग मैं महाराष्ट्र एटीएस को कोई प्रमाण नही मिले तो मीडिया उस पर सम्मोहन विद्या की आड़ के बहाने उसे दोषी साबित करने मैं तुले हुए हैं । मीडिया और देश के तथाकथित अति आधुनिक लोग जो भारतीय पुरातन ज्ञान , योग विज्ञानं और सम्मोहन विद्या जैसे बातों को आधुनिक विज्ञानं के सामने बकबास कहा जाता था आज उसी का सहारा लेकर अपने को सच और अपनी ज्यादती को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है । आज वही भारतीय ज्ञान और विज्ञानं की शरण मैं आकर अपनी हर बात को जायज ठहराने की कोशिश हो रही है । एक महिला साध्वी के साथ इतना सब होने के बाद भी आज देश के महिला हितों के हिमायती एक भी संघठन सामने नही आ रहा है । जो की आश्चर्य और बड़े खेद की बात है । आख़िर कहाँ गए महिला हितों के हिमायती संगठन ?

कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

  कर दो दिल को आज़ाद एहसान मानेंगे जनम   सात .   तुम आओ न मेरे दिल को याद एहसान मानेंगे जनम   सात .     कौन सी घडी थी और कौन से...