#हसरतों की हवा चली ,
मन में एक आशा पली ,
#हौसलों ने हुकार भरी ,
कदमों ने वह डगर पकड़ी ,
जिसमें #मंजिल थी खड़ी ।
परिस्थितियों ने कुछ चाल चली ,
मौसम ने भी मुसीबत की खड़ी ,
जमाने ने की #जंजीरें थी खड़ी ,
#मुश्किलों की हर मार सही ,
पर हिम्मत गिर गिर उठी ,
मंजिल भी कुछ मेरी तरफ बढ़ी ।
अब पक्ष में घटनाऐं थी घटित ,
#चुनौतियां भी आत्मसमर्पित ,
संदेह मात्र नहीं था किंचित ,
हौसले भी अब है हर्षित ,
मंजिल अब न रही अविजित ।
मंजिल अब साथ है खड़ी ,
कदमों की डगर अब है थमी ,
हौसलों की हुंकार भी थमी ,
मन की भी आशा है फली ,
हसरतें भी है हंसी हंसी ।
