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किसी को था यह नहीं पसंद ,
कि बुराइयां जिये और दिन चंद ,
सबने उसका एक पुतला बनाया ,
रावण का उसको रूप धराया ,
सब एकत्रित हुये एक रात ,
वह थी दशहरा के दिन की बात ।
अच्छाइयां रूप धरकर आई ,
राम लक्ष्मण बन दो भाई ,
लेकर हाथ में धनुष बाण ,
बाणों का कर अनुसंधान ,
रावण को जब आग लगाई ,
धूं धूं कर जल गई बुराई ।
गूंजा राम लक्ष्मण का जयकारा ,
रावण को तो खूब लताड़ा ,
हां यूं अच्छाई की जीत हुई ,
और बुराईयों ने दुर्गति सही,
सबके मन में खुशी समाई ,
सबने कहा खत्म हुई बुराई ।
💐💐दशहरा के पावन पर्व की
अनेकों शुभ और मंगलकारी बधाइयां । 💐💐
💐🙏जय माता दी , जय #सियारामजी की 🙏💐
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