सोमवार, 5 मई 2008

महिला आरक्षण- कितने गंभीर सरकार और राजनैतिक दल !

संसद मैं महिला आरक्षण बिल पेश किया जाने वाला है . फिर वह सुगबुगाहट और वही हलचल . सभी राजनैतिक दल महिला आरक्षण की पैरबी करते तो नज़र आते है , किंतु उन्हें लागू करने के प्रति कितने गंभीर होते है यह किसी से छुपा नही है . राजनैतिक दलों ने अपने संगठन स्तर पर कितने पदों हेतु महिला आरक्षण दे रखा है , इस बात से पार्टी की महिला आरक्षण के प्रति सोच और गंभीरता झलकती है . सभी राज नेता महिला आरक्षण तो लागू करना चाहता है किंतु अपना पद और सीट गवाने की कीमत पर नही . लोकसभा मैं तो महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटो को बढ़ाने की बात कर जनता पर और आर्थिक बोझ बढ़ाने की बात की जाती है . सरकार की बात करें तो इस बात से उनकी गंभीरता का पता चल जायेगा की उन्होंने अपने मंत्री मंडल मैं कितने पदों को महिला हेतु अरक्षित रखा है .
आरक्षण या महिला आरक्षण की बात करें तो इसको लागू करने मैं भी भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया जाता रहा है . नौकरियों मैं तो उचित अनुपात मैं महिला आरक्षण की बात की जाती है . पंचायत स्तर की छोटी संस्थाओं मैं भी महिला आरक्षण को लागू करने मैं भी सरकार ने बेशक कड़ाई दिखाई है किंतु विधान सभा स्तर , लोकसभा और राज्यसभा मैं तो यह कही गुम होता नज़र आता है . यंहा तक इन स्तर की सरकारों के मंत्री मंडलों मैं तो और भी स्थिति ख़राब है . अर्थात नियम बनाने वाली और नियम का पालन कराने वाली उच्च स्तरीय संस्थाओं मैं महिला आरक्षण को गंभीरता से नही लिया जा रहा है
हर बार की तरह इस बार भी महिला आरक्षण का बिल संसद पटल पर पेश होने जा रहा है आशा है इस बार इस पर पहले जैसे लीपा पोती न होकर , उसे अपने अंजाम तक पहुचाया जायेगा ।

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