बुधवार, 22 अक्तूबर 2008

देश के कदम चंद्रमा पर - कुछ खुशी कुछ गम !

आज स्वदेश निर्मित मानवरहित चंद्रयान -१ को पी एस एल वी - सी ११ से ६:२० मिनट पर पर चाँद पर कदम रखने हेतु छोड़ा गया । देश की अरबों रुपयों के लागत से तैयार यह एक महत्व्कांची परियोजना है निः संदेह यह कदम देश और देश वासियों के लिए वडा ही गौरान्वित करने वाला क्षण था ।
एक तरफ़ तो देश की यह उपलब्धि विज्ञानं के क्षेत्र मैं लगातार बढ़ते हुए कदम हुए कदम की और इंगित करते है । और इस उच्च तकनीक को भारत के अपने बलबूते पर प्राप्त करने और देश को अमेरिका , जापान , रूस और चीन के पंक्ति मैं ला खड़े करने मैं नि संदेह देश के वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं जिनकी कुशाग्र बुद्धि और कड़ी म्हणत से के योगदान से देश को आज यह गौरव प्राप्त हो रहा है । कल तक जो माँओं की लोरियों मैं मामा के रूप मैं और दादी और नानी की कहानियो मैं देवता के रूप विराजमान थे और जिस पर पहुच पाना अकल्पनीय सपना प्रतीत होता था । किंतु भारत ने आज उसे कल्पनाओं और सपनो की दुनिया से निकालकर सच और यथार्त मैं उसको स्पर्श करने उस पर पहुचने हेतु अपने साहसिक और महत्व्कांची कदम आगे बढाया है । इतने खर्चीले मिशन का उद्देश्य बताया जा रहा है की इससे प्राप्त होने वाली सूचनाएं का विश्लेषण कर इसका उपयोग मानवहित मैं करने की योजना है । कहा जा रहा है की चाँद मैं हीलियम ३ का अपार भण्डार है जिसका प्रयोग देश की उर्जा जरूरत मैं किया जा सकता है । इसी प्रकार चाँद मैं बहुत सारे क्रटर जिसमे भारी मात्रा मैं निकिल और प्लेटिनम जैसी धातुएं पाई जाती है जिसको भी भविष्य मैं प्रथ्वी परिवहन कर लाया जा सकता है । अतः इससे आने वाले भविष्य मैं ग्रहों पर पहुचने के इस प्रकार के मिशन से मानवहित के काम किए जा सकेंगे ।
दूसरी और देश जन्हा अरबों रुपयों खर्च करके चाँद पर कदम रखने जा रहा है वन्ही इस देश मैं आज भी एक गरीब इंसान के लिए दो वक़्त की रोटी जुटाना दूर की कौडी साबित हो रहा है । देश मैं सभी को शिक्षा , स्वस्थ्य और सुरक्षा उपलब्ध कराने की स्थिती दिनों दिन बिगड़ती जा रही है । अभी भी देश के कई हिस्से और कई लोग ऐसे हैं जिन्हें अभी भी बिजली की सुबिधा , स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध नही है और ठीक से पहुच मार्ग भी नही है ।
ऐसे मैं देश का चंद्रमा की और कदम बढाना जन्हा एक और गौरान्वित होने और सुखद अहसास से मन को भर देता है वन्ही देश की यथार्त स्थिति और जमीनी हकीकत को देखकर मन मायुश और दुखित भी होता है । फ़िर भी आशा की जानी चाहिए की देश हर क्षेत्र मैं ऐसे ही नया नए कीर्तिमान स्थापित करे साथ ही देश सभी लोगों को भी मूलभूत आवश्यकताओं के साथ सभी के सुखद जीवन की व्यवस्था भी हो सके ।

3 टिप्‍पणियां:

संजय बेंगाणी ने कहा…

मन मायुस क्यों करते है? यह केवल गर्व के लिए नहीं है, भविष्य का निवेश है. अगर कोई उर्जा संयत्र भारी रकम लगा कर तैयार किया जाता है तो आप निराश होंगे? नहीं ना. वैसे ही इसके बहुत से फायदे गरीबी दूर करने में मदद करेंगे. निवेश से ज्यादा लाभ होना तय है.

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप का लेख मेरे दिल की आवाज है.
धन्यवाद

Suitur ने कहा…

संजय जी से सहमत हूँ .....

आओ संभाल लें रिश्तों को दरकने से पहले !

आओ संभाल  लें  रिश्तों को दरकने से पहले , करें एक पहल नजरों में खटकने से पहले। माना कि कुछ अनबन हो गई हो कभी , कुछ अपने रुसवा ...