रविवार, 24 नवंबर 2019

पत्थर# की पुकार !

                                इमेज गूगल साभार
उठा लो मुझे इन आवारा राहों से ,
न उछाला जाऊं इधर उधर बेकार ,
न खाऊ ठोकरें पग पग की बार बार ,
न लगे मुझसे राहगीरों को चोटों की मार ,
न बनू में हिंसक प्रदर्शनों का हथियार ।

कोई मिला दे मुझे नेक पनाहों से ,
जिसकी नजर पारखी और मन कलाकार ,
जो दूर करें मेरे सारे विकृति और विकार ,
जो तराश कर दे दे मुझे कोई आकार ,
जो लगा दे मेरे स्वरूप में चांद चार ।

हो जाये मेरा जीवन कृतार्थ अभारों से ,
बन जाऊं मैं भवनों का मजबूत आधार ,
या बढ़ा शोभा घरों की बन जाऊं श्रृंगार ,
विराज मंदिरों में बन जाऊं ईश्वरीय अवतार ,
आस्था और श्रद्धा से दिलों का बनूं करार ।
                               *** दी.कु. भानरे (दीप)***
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1 टिप्पणी:

RaviKant Soni ने कहा…

अतिसुंदर :-) आपने तो पुष्प की अभिलाषा की याद दिला दी।