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| Image Google sabhar |
क्यों न कहा अपने दिल की #दास्तां ,
कुछ तो करते हम दर्दे दिल की #दवा,
या तो उठा लेते सर पर #आसमां,
या तो बन जाते #जमीं सा #आसरा ।
क्यों न कहा अपने दिल की दास्तां ,
हम तो तकते रहते थे तुम्हारा रास्ता ,
इसी बहाने मिलने का मिलता तो मौका,
गुजरता वक्त साथ आपके कुछ तो जरा ।
क्यों न कहा अपने दिल की दास्तां,
करते तुम्हारे लिये #सुकून की #दुआ,
मांगते तुम्हारे लिये अपना भी #हिस्सा,
चढ़ते तुम्हारे लिये #मंदिर की #सीढियां।
क्यों न कहा अपने दिल की दास्तां,
#दुशवारियों का कुछ हल तो निकलता,
कुछ तो #संवरती उलझे मन की दशा ,
#संभलता मन आहिस्ता आहिस्ता ।
