बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

कभी कभी एक 'न' भी .......!


करनी चाहिए मदद अपनों की जरुरत पर हर दफा ।
जरुरी है अपनों की खुशियों का ध्यान रखना सदा ।
पर हर बात पर नही मिलायी जा सकती हाँ में हाँ ।
कभी यही आदत बन जाती है परेशानी भरा जहां।
ये सोचकर कि इंकार न कर जाये अपनों को खफा ।
और ढोते रहते हैं बोझ उस हाँ का बुझे मन से हमेशा ।
बातें जो करे असहज लम्हा , उन्हें करना सीखें मना ।
कभी कभी एक 'न' भी  ,  आसान कर देगी जीना । 

कोई टिप्पणी नहीं:

सब कुछ छोड़ आया कुछ पाने की आस में !

सब कुछ छोड़ आया कुछ पाने की आस में । सब कुछ छोड़ आया कुछ पाने की आस में । मुझे खूब आगे बढ़ना है मुझे कुछ बनना है , शोहरतें और सब...