सोमवार, 25 अक्तूबर 2021

बस इतना सा #फसाना है।



चाहत यह उनकी

बस इतना सा  फसाना  है।  

चाहतों का समंदर है ,

और डूबते ही जाना है । 

 

फूलों की खुशबू भी  ,

अब करती नहीं  दीवाना है ।

उनकी सांसों की खुशबू ही

करे मौसम  सुहाना है । .........  

 

महफिल भी सितारों की ,

अब लगती वीराना है ।

साथ ही उनका अब तो ,

महफिलों का खजाना है ।.........

 

चाँदनी रात का शबाब भी ,

अब दिल  को नहीं गवारा है ।

चमक उनकी आंखे की  ,

दीप दिवाली का नजारा है । .........

 

समंदर से भी गहरा  ,

लगाव यह हमारा  है ।

चाहत अनंत आकाश है  ,

और चाहत ही सरमाया है । .........

 

चाहत यह उनकी

बस इतना सा  फसाना  है।  

चाहतों का समंदर है ,

और डूबते ही जाना है ।

4 टिप्‍पणियां:

Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26 -10-21) को "अदालत अन्तरात्मा की.."( चर्चा अंक4228) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
--
कामिनी सिन्हा

Sudha Devrani ने कहा…

वाह!!!
बहुत ही लाजवाब।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय सिन्हा मेम ।
इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा को "अदालत अन्तरात्मा की.."( चर्चा अंक4228) पर शामिल करने के लिए सादर धन्यवाद और आभार ।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

आदरणीय सुधा मेम ,
आपकी लाजबाब टिप्पणी हेतु सादर धन्यवाद ।