कभी
रुखसत न हो जाना
कहता
है दिल ये सयाना
रब
से मिले तुम नजराना
कहता
है दिल ये सयाना .
बना
लो दिल में आशियाना
देते
हैं लिख ये राजीनामा
अब
करो न ज्यादा बहाना
स्वीकार
करो हमारा ये नजराना .
कभी
रुखसत न हो जाना
कहता
है दिल ये सयाना
रब
से मिले तुम नजराना
कहता
है दिल ये सयाना .
यकीन
में रखा है याराना
महफूज
जहाँ मन का घराना
तुम
घर मेरा ऐसा सजाना
जैसे
परिंदों का घोसला है बनाना.
कभी
रुखसत न हो जाना
कहता
है दिल ये सयाना
रब
से मिले तुम नजराना
कहता
है दिल ये सयाना .
सांसों
के रास्ते है समाना
पलकों
में आकर बैठ जाना
दिल
को जरा मेरे अपनाना
एहसान
मानेगा दिल ये दीवाना .
कभी
रुखसत न हो जाना
कहता
है दिल ये सयाना
रब
से मिले तुम नजराना
कहता
है दिल ये सयाना .
बुना
है जो चाहत का तानाबाना
उसे
नजर न लगाये जमाना
रब
कुछ ऐसे कृपा बरसाना
की
रहे बरकरार सदा यह चाहताना .
कभी
रुखसत न हो जाना
कहता
है दिल ये सयाना
रब
से मिले तुम नजराना
कहता
है दिल ये सयाना .

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 01 अक्तूबर, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर सृजन ।
जवाब देंहटाएंबहुत धन्यवाद आदरणीय मेम।
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