मंगलवार, 29 अप्रैल 2008

चियर्स गर्ल्स की जगह चियर्स बाय क्यों नही .

आई पी एल के २० - २० क्रिकेट मैं हर सुखद क्षण मैं हर्षो उल्लास व्यक्त करने के लिए चियेर्स गर्ल्स की उपस्थिति सुनाश्चित की गई है । किंतु जिस उन्मुक्त और खुले रूप मैं पाश्चात्य संस्कृति अनुरूप उसे अपनाया गया है वह विवाद का विषय बना हुआ है । ऐसे स्थिति मैं विरोध होना स्वाभविक हैं । इनके इस उन्मुक्त प्रदर्शन से मैदान मैं खेल रहे खिलाडियों का भी ध्यान भंग हो रहा है । इन सबके इतर मैं दूसरी बात की और ध्यान दिलाना चाहता हूँ की हमेशा प्रदर्शन और आकर्षण के माध्यम के रूप मैं महिलाओं को ही क्यों चुना जाता है , पुरुषों को क्यों नही । अखवार और टीवी पर आ रहे विज्ञापनों की बात करें या फिर कार्यालयों मैं रिसेप्स्निस्ट की बात हो , टीवी और रेडियों मैं चल रहे कार्यक्रमों की उदघोषिका की बात करें , सभी मैं महिला उम्मीदवार को ही प्राथमिकता दी जाती है । कई बार तो यह देखने मैं आता है की प्रचारित किए जाने वाले विज्ञापन या फिर अन्य किसी कार्यों का दूर दूर तक महिलाओं से सम्बन्ध न होने पर भी महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है ।
क्या इन कार्यों मैं पुरुषों की भागीदारी सुनिश्चित नही की जा सकती है । क्या चियर्स गर्ल्स की जगह चियर्स बाय को खुशी व्यक्त करने के लिए नही चुन सकते हैं । क्या जितना महत्व विश्व सुंदरी प्रतियोगिताएं पर ध्यान दिया जाता है क्या उतना तब्ज्जो के साथ विश्व श्रेष्ट पुरूष या फिर विश्व स्मार्ट पुरूष की प्रतियोगिता का आयोजन नही किया जा सकता है । क्या रेडियों और टीवी के विज्ञापनों , समाचारों और कार्यक्रमों हेतु पुरुषों को बराबरी से स्थान दिया नही जा सकता है ।
आख़िर ऐसा क्यों और कब तक ? क्या आगे वाले मैचों मैं चियेर्स बाय क्रिकेट के हर इन्जोय वाले मुमेंट पर खुशी व्यक्त करते हुए दिखेंगे ?

5 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

सही प्रश्न उठाया है
ब्लाग जगत में भी नारियों का ब्लाग है, बेटियों का ब्लाग है, लेकिन बेटों, पुरुषों का ब्लाग नहीं है. बेटों का होना मतलब कोई गुनाह करना माना जाना लगा है.

अल्पना वर्मा ने कहा…

cheers boys hain to--aapne kal ke match mein nahin dekhe???banglore [dhoni wale match mein]wale match mein--band ke peechey 6-7 boys naach rahe they-i think they were with band[drummer]--difference was only their clothes--they were fully covered unlike cheer girls on the same ground---

mamta ने कहा…

अल्पना जी ने बिल्कुल ठीक कहा है। कल के गेम मे भी चीयर बॉय थे और उसके पहले दिल्ली वाले मैच मे भी थे।
लगता है आप लोग ध्यान से नही देखते है। :)

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

अल्पना और ममता जी आपने सही कहा कि चियर वोयस थे मगर देखने वाले तो दखने वाली चीज को ही देखेंगे ना... इसमें दर्शकों का क्या दोष :)

Udan Tashtari ने कहा…

टिप्पणियाँ मसला हल करते दिख रही हैं. :)