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सोमवार, 2 मार्च 2026

होली को मनाने आ गये !


होली को मनाने आ गये

हम रंग लगाने आ गये


मिले जो राह में , 

भर लो बांह में

दिल को दिल से 

मिलाने आ गये ।

 

गम की गली न  दाल

कर उदासी को  बेहाल 

हम खुशियाँ मनाने आ गये ।


दे कदमों को झूमती चाल

हाथ हवा में उछाल

हम सबको नचाने आ गये ।


गुस्ताखियाँ हुई नजर अंदाज

मिल गये  सबसे हाथ

हम प्यार बढ़ाने आ गये ।


होली को मनाने आ गये

हम रंग लगाने आ गये

मिले जो राह में , 

भर लो बांह में

दिल को दिल से 

मिलाने आ गये ।


होली के पावन पर्व की 

बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं बधाइयाँ .   


कृपया इस गाने को YouTube में सुनने हेतु नीचे लिंक में क्लिक करें . 

!! होली को मनाने आ गये !! !


गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

बहलता रहेगा तब तक ये #दिल ।

 


रहेगी ख़यालों में

जब तक तुम्हारी टहल

बहलता रहेगा

तब तक ये दिल ।

 

अकेला न हुआ कभी

सूनेपन भरे रहे  सभी

जब तक है यादों में

तुम्हारी ही  हलचल ।

 

गम ने बनाई दूरियाँ

उदासी न करे अठखेलियाँ 

खुशियाँ  लिख रही

अब तो नयी गजल ।

 

सुकून न रहा विदा कभी

बहती रही राहत की नदी

अब तो कुछ ऐसे ही

मन में है चहल ।

 

सूरत आँखों में है बसी

मन में समाई है हंसी

अब तो ऐसे ही

मन रहा है बहल .

 

याद बने अब हकीकत

रहो साथ अब हर वक्त

अब तो आकर सदा के लिये  

मेरी जिदंगी दो बदल .  

 

रहेगी ख़यालों में

जब तक तुम्हारी टहल

बहलता रहेगा

तब तक ये दिल ।

शनिवार, 24 जनवरी 2026

देश मेरा सरताज है बना .

बड़ी देश की शान है

महान है बड़ा

गौरव और सम्मान से

देश मेरा सरताज है बना .

 

नीला आसमान है

हरी है वसुंधरा

बिखरा वैभव देश में

सोना सा खरा .

 

पराक्रम का उफान है

परिश्रम साथ सदा

मेहनत और पसीने से

देश लिख रहा गाथा .

 

समृद्ध अब विज्ञान है

तकनीक है ज्यादा

समृद्धि और विकास की

देश पाया नई दिशा .

 

जन जन में गुमान है

हर मन में मान बड़ा

गौरव और स्वाभिमान से

सबका चमका है माथा  .

 

बड़ी देश की शान है

महान है बड़ा

गौरव और सम्मान से

देश मेरा सरताज है बना .

 

गणतंत्र दिवस की अनेकों अनके शुभकामनाएं .

जय हिन्द जय भारत , वन्दे मातरम . 

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

नए वर्ष का ऐसा आगमन हो ।

 



आनंद हो मस्ती हो 

मनोकामनाओं की तृप्ति हो 

ईश्वर की सरपरस्ती में

खुशियों की अपनी बस्ती हो।


सुकून का किनारा हो 

उम्मीदों का चमकता तारा हो

शीतल पवन का बयारा हो 

सदा ऐसी जीवन धारा हो ।


हर मुश्किल का हल हो 

इरादा इतना अटल हो कि

सब आपदा विफल हो 

और सफलता का सदा फल हो ।


शुभकामनाओं से भरा दामन हो ,

बधाईयों का सदा आगमन हो ,

उत्सवों के ढेरों आयोजन हो , 

खुशियों से भरा ये जीवन हो . 


नए वर्ष का ऐसा आगमन हो । 

नए वर्ष का ऐसा आगमन हो । 

नव वर्ष की बहुत शुभकामनाएं एवं बधाइयां । 

शनिवार, 22 नवंबर 2025

साथ तेरा लगे ऐसा !

 


साथ तेरा लगे ऐसा

जैसे प्रभु की है  कृपा .

 

मेरी दुनिया हुई

ख़ुशी के काबिल है

भटकती लहरों को

जैसे मिला साहिल है

सुकून में है अब तो

वक्त का हर लम्हा .

 

उदासी के बादल

अब हुये धूमिल है

चाँद सितारों सी

सजी महफ़िल है

अहसास में है अब तो

एक प्यारा सा समा .

 

राह में अब तक

न हुई मुश्किल है

चाहा  था जो वो

हुआ हासिल है

जिन्दगी से हमें अब

करने को रहा न गिला .

 

साथ तेरा लगे ऐसा

जैसे प्रभु की है  कृपा .


सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

जल उठे हैं घर घर दीप !

 


जल उठे हैं  घर घर दीप

रात्री अमावस्या माह कार्तिक ।

जल उठे हैं  घर घर दीप

रात्री अमावस्या माह कार्तिक ।

 

समुद्र मंथन से रतनों  के बीच

प्रकट हुई माँ लक्ष्मी धन प्रतीक

चरणों में उनके झुकेंगे शीश

सुख समृद्धि का पाने आशीष ।

 

श्री राम की हुई रावण पर जीत

अधर्म अनाचार विरुद्ध बने धर्म प्रतीक

चरणों में उनके झुकेंगे शीश

आचरण से उनके लेने सीख ।

 

नरकासुर राक्षस का किये वध

सत्यभामा संग भगवान श्रीकृष्ण

चरणों में उनके झुकेंगे के शीश

गाने उनके महिमा गीत ।

 

जल उठे हैं  घर घर दीप

रात्री अमावस्या माह कार्तिक ।

जल उठे हैं  घर घर दीप

रात्री अमावस्या माह कार्तिक ।


दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं बधाइयाँ . 

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

#माँ की ऐसी #कृपा हो गयी .

 

इमेज गूगल साभार

माँ की ऐसी  कृपा हो गयी 

सारी विपदा विदा हो गयी .

 

दर्द के जो थे जख़म

सब को मिल गया मरहम

कर माता रानी के स्मरण  

दुखों की दवा  हो गयी .

  

अभावों का रहा न मौसम

हालात रहे न विषम

नित मातारानी का पूजन

सुख की सदा हो गयी ।

  

मात खा रहे है दुश्मन

लहरा रहा है जीत का परचम

माता रानी के छूये है चरण

शतरुओं की अब आपदा हो गयी ।

  

माता रानी बैठी है आसन

भक्त सारे है प्रसन्न

करके माता रानी के दर्शन

दुनिया माँ की दया हो गयी ।

 

माँ की ऐसी  कृपा हो गयी ।

सारी विपदा विदा हो गयी .


रविवार, 14 सितंबर 2025

हिंदी है मेरा अभिमान ।

 

इमेज गूगल साभार

सेतु और संगम है
जिसमें गुजरती संस्कृतियां महान 
सागर और नदियां है 
करते जिसमें भाव सभी स्नान 
सहयोग और समर्पण है 
निहित है जिसमें परोपकार और कल्याण 
विचार , सूचना और ज्ञान का
होता जिसमें अदान प्रदान आसान 
ऐसी प्रभामयी और प्रभावशाली 
हिंदी है मेरा अभिमान ।

है समाहित जिसमें 
आदर और सम्मान 
कल्पना और उपमाओं से 
जो पत्थर में फूंके प्राण 
स्तुति और वंदना से 
जो लाये समीप भगवान 
सुख शांति और खुशियों का
है उपलब्ध जिसमे सारा आख्यान 
ऐसी समृद्ध और सशक्त 
हिंदी है मेरा अभिमान ।

🌷🌷हिंदी दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं ।  🌷🌷

                    ***दीपक कुमार भानरे ***

गुरुवार, 4 सितंबर 2025

रहे जीवन में शुभ लाभ प्रवेश !

रहे जीवन में शुभ लाभ प्रवेश  

बोलो जय जय श्री गणेश .


बाधाओं का न कोई बंधन

रोगों से न कोई सम्बन्ध

सदा स्वस्थ रहे  तनमन

मिट जाते सारे कलेश .

 

रहे जीवन में शुभ लाभ प्रवेश 

बोलो जय जय श्री गणेश .

 

हर मुश्किल के मिलते हल

बिगड़ी बात जाती संभल

बुरा वक्त भी जाता टल

काज न रहते कोई  शेष .

 

रहे जीवन में शुभ लाभ प्रवेश 

बोलो जय जय श्री गणेश .

 

सदा सुख समृद्धि समावेश

रहता खुशियों भरा परिवेश

दिन बन जाता बड़ा विशेष

मन भजता जब श्री गणेश .

मन भजता जब श्री गणेश .

 

रहे जीवन में शुभ लाभ प्रवेश 

बोलो जय जय श्री गणेश .

गुरुवार, 21 अगस्त 2025

जीना पड़ता है यहां मन को मार ।

  

 

                                इमेज गूगल साभार

चलती है यहां कहां

मन की सरकार 
जीना पड़ता है यहां
मन को मार ।

रिश्तों के बंधन है 
और ढेरों संस्कार 
स्नेह बंधन है जुड़े 
और मर्यादा के तार ।

ख्वाब है ढेरों 
उम्मीदों की लंबी कतार 
चल रही है जिंदगी 
लेकर इनके भार ।

परिस्थितियां भी कई ऐसी 
करती लाचार 
चाहते हुए न मन के भी 
करने पड़ते है कई कार ।

चलती है यहां कहां
मन की सरकार 
जीना पड़ता है यहां
मन को मार ।

शुक्रवार, 15 अगस्त 2025

महफूज जहां मेरा तन मन ।

शनिवार, 5 जुलाई 2025

#बारिश की बारात में करना पड़ेगा विदा ।

 


कब तक संभाल रखोगे
जल #बूंदों का कारवां
कभी तो करना होगा विदा
एक दिन ए #आसमां।

माना कि कई दिवसों से 
अपने आंचल #मेघ में 
जिनको रखा था छुपा ,
#बारिश की बारात में 
करना पड़ेगा विदा 
एक दिन तो आसमां ।

किरणों के स्नेह वश
चल पड़ी थी साथ 
अथाह जल राशि
छोड़ अपनी धरा ,
लेकर ताप 
सूर्य किरण का 
मिल रहे थे इस धरा से
जब तुम ए आसमां ।

पार कर हद अपनी
आई चलकर
बूंद बूंद तुम तक
लेकर रूप हवा ,
समा लिया 
इनको समेटकर
मेघ से अपने आंचल में 
तुमने ए आसमां ।

बिजली की दे दो चपलता
और मेघ की गर्जना 
सितारों की दे दो चमक 
और चांद की शीतलता ,
बूंदों को उपहार की 
देकर यह श्रृंखला 
करने फिर से धरा तृप्त
कर दो विदा ए आसमां ।

कब तक संभाल रखोगे
जल बूंदों का कारवां
कभी तो करना होगा विदा
एक दिन ए आसमां।
            **"दीपक कुमार भानरे" **

रविवार, 15 जून 2025

सीने में #रात के #चिंगारी का ऐसा #खंजर चुभाओ !


जितना न लिखा हो किस्मत में अपनी

कुछ उससे ज्यादा ही पाने की जुगत लगाओ

गर आया पसंद आसमां में कोई सितारा

तो टूटकर झोली में गिरने तक  नजर न हटाओं  .

 

सुलझी नहीं है गुत्थियाँ जो अब  तक

सुलझाने को उनको अपना मन बनाओं

जबाब जिसका किसी के पास न हो

ऐसे  प्रश्न के उत्तर पर अपन दिमाग खपाओ .

 

न होने दो रात को इतनी ज्यादा लम्बी

की आगोश में उसके नींद सुकून पा जाये

झपके कुछ इस तरह से अपनी  पलकें

की आँखें बस कुछ पल ही सुकून पाये .

 

सीने में रात के चिंगारी का ऐसा खंजर चुभाओ

की बस्तियां अँधेरे की जलकर खाक हो जाये

फिर उम्मीद के उजाले का एक नया घर सजाओ

जहाँ मुसाफिर मंजिलों के ठहर विश्राम पाये .  


रविवार, 25 मई 2025

#पुरानी सी एक #हवेली !

 


#पुरानी सी एक #हवेली
कहता गांव #भूतों की सहेली
दिन में होती आम बात
पर हो जाती रात खौफनाक
जो अब तक है अबूझ पहेली
और बनी है अब तक एक राज ।

हवाओं के झोंको से
चरमराते और कराहते कपाट
अंदर अंधेरे कमरे में
बर्तन गंदे और टूटी एक  खाट
बैठा जिस पर एक शख्स
बुरी शक्ल करता बकवास
छिपकली ,चमगादड़ और मकड़ी
जैसे है उसके अपने और खास ।

उल्लू और कुत्ते सियार
जिनकी डरावनी रोती आवाज
जानवरों की चमकती
घूरती अंधेरे में डरावनी आंख
सूखे पत्तों पर  चलने की
खर खर करती  पदचाप।

जाता जो भी वहां रंगबाज
आया न वापस वो उस रात
कुछ चीखें ओर कुछ छटपटाहट
और पक्षियों की मंडराती बारात
फिर एक सुई पटक सन्नाटा
और जरा भी न चि पटाक
बंद हो गया हवेली में
एक और रहस्यमय राज ।
                  ***दीपक कुमार भानरे***

शुक्रवार, 16 मई 2025

#भारत ने खेल #खेल दिया ।

 

रातों रात रेल दिया
घुसकर अंदर पेल दिया
आतंकिस्तान में तबाही का
भारत ने खेल खेल दिया ।

भस्म हुये आतंकी नापाक
फेल गई बस आग ही आग
अड्डे सब हुये है जलकर खाक
भारत ने मचाया ऐसा सर्वनाश ।

बदला बना ऐसा नजीर
सटीक निशाने पर थे सब तीर
छोड़ा बनाकर दुश्मन को फकीर
धन्य धन्य भारत के सैन्य वीर ।

आंख उठाकर अब देखा अगर
तो भारत मचायेगा ऐसा कहर
टूट टूटकर सब जायेगा बिखर
दुश्मन न आयेगा नक्शे में नजर ।

जय हिंद जय भारत ।

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

पूछ रही है #महफिलें ।


शाम ने #बांधा समा 

रात ने दी #दस्तक 

अब पूछ रही है #महफिलें 

जागना है कब तक । 


दौर पर दौर चले 

जाम के लव तलक

अब पूछ रहे है प्याले 

रहना होश में कब तक ।


चाँद भी डूबा डूबा है 

चाँदनी भी है मदमस्त 

पूछ रही है जुगनू 

चमकते रहना है कब तक । 


साँसों से साँसो की खुशबू 

तूंफा उठाये दिलकश 

पूछ रही है फूलों की खुशबू 

बागों में ही रहना है कब तक । 


चल पड़ी है ठंडी बयार 

मिलने लगी है दिलों को ठंडक 

सोच रही है अब महफिलें 

कि जल्द मिलेगी राहत । 

             *** दीपक कुमार भानरे ***  

रविवार, 6 अप्रैल 2025

#श्रीराम #अवतरण, प्रभु पड़े चरण ।

 

#श्रीराम #अवतरण
प्रभु पड़े चरण
जगत जन जन
सब प्रभु शरण ।

कृपा सिंधु नयन
मर्यादा पुरुषोत्तम
सदा सत्य वचन
श्री राम भगवन ।

दुष्टों का दलन
बुराइयों का दहन
धर्म ध्वजा परचम
श्रीराम शुभ आगमन ।

प्रफुल्लित मन
आस्था आच्छादन
राम राम कण कण
परम आनंद परम आनंद ।

🙏💐श्रीराम नवमी राम जन्मोत्सव
की कोटिश शुभकामनाएं ।
        **जय सियाराम जी की ** 💐🙏
              **दीपक कुमार भानरे**

शनिवार, 29 मार्च 2025

बड़ा ही #विशेष था #शुभ #मुहूर्त (#muhurt) ।


बड़ा ही विशेष था शुभ मुहूर्त

कि जुड़ा था ये मन उनसे अटूट ।

 

धरा में थी हल्की भोर की धूप

और बयार थे शीतलता से अभिभूत ।

 

करती निनाद मंदिर की घंटियाँ

ईश्वर कृपा के मन से हो  वशीभूत

अर्चना और प्रार्थना के उच्चारण से

बने थे  होंठ ईश्वर के  देवदूत ।

 

श्रद्धा और सुकून की दौलत

समेटने को बिखरी थी अकूत ।

 

बागों में छेड़ रही थी तान  

मधुर कोयल की कूक

और मची हुयी थी मधुमाखियाँ में

पराग कण को पीने की लूट ।

 

भँवरे और तितलियाँ के दल  

मंडरा रहे थे फूलों पर खूब ।

 

जब रात से मिलने सूरज   

आसमां में रहा था डूब

अपने अपने घरों की और

पंछी भी कर रहे थे कूच ।

 

पाकर चाँद तारों का  सानिध्य

आसमां भी पा लिये थे नये रूप ।

 

बड़ा ही विशेष था शुभ मुहूर्त

कि जुड़ा था ये मन उनसे अटूट ।

                                *** "दीप"क कुमार भानरे *** 

होली को मनाने आ गये !

होली को मनाने आ गये हम रंग लगाने आ गये मिले जो राह में ,   भर लो बांह में दिल को दिल से  मिलाने आ गये ।   गम की गली न   दाल कर उ...