फ़ॉलोअर

शनिवार, 28 अगस्त 2021

यूँ देखकर हमको क्यूँ #किनारा कर लिया !


यूँ   देखकर हमको क्यूँ किनारा कर लिया ,

मन को बेघर कर क्यूँ बंजारा कर दिया ,

पलकों से नींदों को नौ दो ग्यारह कर दिया ,

होठों की हंसी पर भी एक ताला जड़ दिया ।

 

सुबह सबेरे  मॉर्निंग वॉक में वो आपकी एक झलक ,

ठंडी हवायें और उस पर आपकी साँसों की महक ,

हमारे तुम्हारे कदमों के साथ चलती थी एक सड़क ,

राहों को  बदलकर शुभ प्रभातों से बेसहारा कर दिया ।

 

फेसबुक की हर पोस्ट पर करते थे लाइक ,

सेल्फी भी  खींचकर करते  थे शेयर डे-नाइट ,

मोबाइल पर चैट की कुछ कम न  थी  डाइट ,

यूँ  वर्चुअल सौगातों का क्यूँ बंद खजाना कर दिया ।

 

जब छत पर सूखे कपड़े उठाने की होती थी भनक ,

तब पतंगों के साथ हमारी भी हो जाती थी धमक ,

फिर नभ के उड़ते पंछियों को निहारती थी चारों पलक ,

पर अचानक डूबते सूरज सा क्यूँ नजारा कर दिया ।

 

यूँ   देखकर हमको क्यूँ किनारा कर लिया ,

मन को बेघर कर आवारा कर दिया ,

पलकों से नींदों को नौ दो ग्यारह कर दिया ,

होठों की हंसी पर भी एक ताला जड़ दिया ।

                                         ***दीप***


होली को मनाने आ गये !

होली को मनाने आ गये हम रंग लगाने आ गये मिले जो राह में ,   भर लो बांह में दिल को दिल से  मिलाने आ गये ।   गम की गली न   दाल कर उ...