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रविवार, 16 फ़रवरी 2025

सुंदर सूर्य अस्त समावेश ।


सूर्य किरण तेज 

लिये है जल सहेज 

धर लालिमा भेष 

सुंदर सूर्य अस्त समावेश ।




ऊष्मा है निश्तेज

शीतलता का है प्रवेश

अवनी अंबर करते भेंट

सूर्य अस्त बेला विशेष ।



हर्षित है हृदय 

पुलकित है नेत्र

पाकर सानिध्य सुखद 

सूर्य अस्त परिवेश । 



भभूती तमस लपेट

आतुर निशा नृपेश

जमाने प्रभुत्व प्रदेश

कर सूर्य अस्त आखेट ।

                 ***दीपक कुमार भानरे***


मंगलवार, 4 फ़रवरी 2025

हमारे न होने का #अहसास वो करते हैं !

 


हमारे न होने का
#अहसास वो करते हैं
किसी #महफिल का
जब वो #आगाज करते हैं ।

छोड़ देते है एक जगह
मेरे नाम के पैमाने की
पूछते हैं बार बार वजह
यूं महफिल में मेरे न आने की
फिर मिलकर मेहमानों से
मुस्कराने का यूं ही रिवाज करते हैं ।

ढूंढती हैं नजरें उनकी हर पता
हमारे होने के उस ठिकाने की
मांगते हैं मन्नतें बार बार रब से
उस जगह महफिलें सजाने की
सोचकर ऐसे ही वो हर बार
फिर एक महफिल का आगाज करते हैं ।

हमारे न होने का
अहसास वो करते हैं
किसी महफिल का
जब वो आगाज करते हैं ।
               ** दीपक कुमार भानरे **

#श्रीराम #अवतरण, प्रभु पड़े चरण ।

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