कर दो दिल को आज़ाद
एहसान मानेंगे जनम सात .
तुम आओ न मेरे दिल को याद
एहसान मानेंगे जनम सात .
कौन सी घडी थी
और कौन से थे हालात
जब नजर डूब गई
बेहिसाब
जो दिल निकल गया मेरे हाथ .
कौन सा था वो दाब
और कौन सी थी
बिसात
नजरें समझ न पाई
चाल ख़ास
जो भा गया दिल को उनका अंदाज .
कौन सा था जादू
या
कोई विघन थी साढ़े
सात
नजरे कर गई कौन
सा फसाद
जो दिल से दिल कर गया मुलाक़ात .
दिल पहले था आज़ाद
या अब हुआ है आबाद
दिल में छाया ये कैसा अहसास
दिल लगा न पाया कोई कयास .
कर दो दिल को आज़ाद
एहसान मानेंगे जनम सात .
तुम आओ न मेरे दिल को याद
एहसान मानेंगे जनम सात .

जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 1 जुलाई 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
आदरणीय मेम, मेरी इस रचना को पांच लिंकों के आनंद में शामिल करने के लिए बहुत धन्यवाद एवं आभार । सादर ।
हटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंआदरणीय आपकी बहुमूल्य टिप्पणी हेतु बहुत धन्यवाद।
हटाएंबहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंआदरणीय आपकी बहुमूल्य टिप्पणी हेतु बहुत धन्यवाद।
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