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शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2024

जब #आग लगी हो #सीने में !

इमेज गूगल साभार

#आराम कहां है जीने में ,

जब #आग लगी हो #सीने में ।


धधकती है #ज्वाला अंदर ,

लेकर #हौसलों का #समंदर ,

हार न माने तब तक ,

कतरा कतरा #खून का ,

बह न जाये #पसीने में ।


पर्वत क्या, पहाड़ क्या ,

दुश्मनों की #दहाड़ क्या ,

#खाक छानेंगे तब तक ,

खप न जाये जिंदगी यह,

#मुश्किलों का #लहू पीने में ।


#सहूलियतों से वास्ता नहीं,

पसंद सीधा साधा रास्ता नहीं ,

तकलीफों से #ताल्लुकात तब तक,

#हौसलों #हुंकार न भरे जब तक,

मंजिलों के चढ़ सीने में ।


आराम कहां है जीने में ,

जब आग लगी हो सीने में ।

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